मंगलवार, 28 जून 2022

दारुहल्दी के बारे में जानकारी | Barberry Fruit In Hindi

    हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। तो आज हम इस आर्टिकल में बात करने वाले हे दारुहल्दी के बारे में जानकारी, अमेजिंग फैक्ट्स, दारुहल्दी खाने के फायदे और नुकशान, दारुहल्दी के औषधीय गुण और Faq तो उम्मीद हे की आपको यह हमारा आर्टिकल पसंद आयेंगा। तो चलो देखते हे दारुहल्दी के बारे में....

दारुहल्दी के बारे में जानकारी

दारुहल्दी के बारे में जानकारी

      दारुहल्दी एक फल के रूप में भी मानी जाती हे। और इसकी ज्यादातर खाद्य फलो के लिए खेती की जाती हे। दारुहल्दी का वृक्ष कांटेदार और झाड़ीनुमा होता हे। इस पेड़ की ऊंचाई करीबन 15 फिट तक होती हे। आयुर्वेदमे ऐसे कई पौधे हे जो जड़ी बूटियों के प्रयोग में लाये जाते हे। दारुहल्दी भी उनमे से एक हे। दारुहल्दी को दारुहरिद्रा भी कहा जाता हे। और अंग्रेजी में इस फल को इंडियन बर्बरी कहा जाता हे। दारुहल्दी नेपाल, श्री लंका जैसे हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता हे। इसका प्रयोग मधुमेह रोग के निदान में विशेषकर किया जाता हे। विश्व में दारुहल्दी की तीन प्रजातियां पायी जाती हे। जैसे की दारुहरिद्रा, मांगल्य की जडम, वन मागल्य। 

    दारुहल्दी का पोधो छोटा होता हे। इसके तने की छाल खुरदरी होती हे। और इसके पत्ते लम्बे, चौड़े और चर्मिल होते हे। इस पौधे के फूल बहोत छोटे होते हे। इसके फल जून महीने में लगते हे। और यह फल 7 से 10 मिमी लम्बे, अंडाकार लाल या श्यामले नीले रंग के होते हे। दारुहल्दी का वानस्पतिक नाम बरबेरिस एरिस्ट्रेटा हे। दारुहल्दी हमारे शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद होता हे। 

दारुहल्दी के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स

1. दारुहल्दी एक फल और औषधीय पौधा है। 

2. वीश्व में दारुहल्दी की करीबन तीन प्रजातियां पायी जाती हे। 

3. दारुहल्दी का वानस्पतिक नाम बरबेरिस एरिस्ट्रेटा हे। 

4. दारुहल्दी हमारे शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद होता हे। 

5. दारुहल्दी नेपाल, श्री लंका जैसे हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता हे। 

6. दारुहल्दी को आयुर्वेदकी जड़ी बुट्टी भी कहा जाता हे। 

7. दारुहल्दी फल को अंग्रेजी में इंडियन बर्बरी कहा जाता हे।

दारुहल्दी खाने के फायदे

1. त्वचा के रोगो के लिए फायदेमंद

    त्वचा पर घाव, फक्ने आदि समस्या से छुटकारा पाने के लिए दारुहल्दी का प्रयोग किया जाता हे। कई आयुर्वेदिक दवाओं में दारुहल्दी का उपयोग किया जाता हे। उनकी एक निश्रित मात्रा उन दवाओं में दी जाती हे। अगर आपको किसी भी तरह का स्किन रोग हे। तो नारियल के तेल में दारुहल्दी का चूर्ण मिलाकर परिशानी वाली जगह पर लगाए। 

2. डायबिटीज के मरीजों के लिए

     इस फल में एचबीए 1 सी कम करने की स्यमता होती हे जो की रक्त ग्लूकोज के स्तर को नियत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण होता हे। इसके अतरिक्त यह फल रक्त ग्लूकोज को नियत्रित करने में मदद करता हे। जो कार्बोहाइड्रेड के चयापचन एंजाइमों के सक्रियण के कारण हो सकता हे। इसलिए यदि आप शुगर से पीड़ित हे तो आपको दारुहल्दी का सेवन करना चाहिए।

3. आँखों के लिए फायदेमंद 

    दारुहल्दी को आँखों से सबंधित समश्याओ को दूर करने के लिए भी माना जाता हे। एक रिसर्च के अनुसार दारुहल्दी से बनने वाले रसौत से आँखों के इम्फेमेशन यानी ऑप्थमलिया से बचाव हो सकता हे। साथ ही आँख आने यानी कंजक्टिवाईटिस से भी कुछ राहत मिल सकती हे। 

4. बुखार ठीक कर सकता हे 

     कई लोगो को बदलते मौसम में बुखार आ जाता हे। ऐसे में दवाइया लेने के बजाय आप आयुर्वेदिक उपाय कर सकते हे। दारुहल्दी की छाल का काढ़ा बनाकर पिने से बुखार की समस्या कम हो जाती हे। शरीर का तापमान बढ़ने की वजह से बुखार हो जाता हे। दारुहल्दी इस परिशानी को दूर कर सकता हे।

दारुहल्दी खाने के नुकशान

1. दारुहल्दी में एंटी फंटिलिटी का प्रभाव होता हे। ऐसे में यह प्रजनन श्रमता को प्रभावित कर सकता हे। इसी वजह से गर्भधारण करना चाह रही महिलाओको इसका सेवन नहीं करना चाहिए। 

2. दारुहल्दी में एंटी हाइपरग्लाइसेमिक गुण होता हे। यह गुण ब्लड ग्लूकोज के स्तर को कम कर सकता हे। ऐसे में जिन लोगो को ब्लड शुगर की समस्या हे। वो उसका सेवन न करे।

दारुहल्दी के पौधे का औषधीय गुण इस वीडियो में

अक्शर पूछे जाने वाले सवाल

1. विश्व में दारुहल्दी की कितनी प्रजातियां देखने को मिल जाती हे ?

विश्व में दारुहल्दी की करीबन तीन प्रजातियां देखने को मिल जाती हे। 

2. दारुहल्दी कहा पायी जाती हे ?

दारुहल्दी नेपाल, श्री लंका जैसे हिमालयी क्षेत्रों में पायी जाती हे। 

3. दारुहल्दी के फल को अंग्रेजीमे क्या कहते है ?

दारुहल्दी के फल को अंग्रेजीमे इंडियन बर्बरी कहा जाता हे। 

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एवोकाडो फल के बारे में जानकारी

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एवोकाडो फल के बारे में जानकारी | Avocado Fruit Information In Hindi

     हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। तो आज हम इस आर्टिकल में बात करने वाले हे एवोकाडो फल की जानकारी, अमेजिंग फैक्ट्स, एवोकाडो खाने के फायदे और नुकशान, एवोकाडो की खेती और Faq तो उम्मीद हे की आपको यह हमारा आर्टिकल पसंद आयेंगा। तो चलो देखते हे एवोकाडो के बारे में।

एवोकाडो फल के बारे में जानकारी   

एवोकाडो फल के बारे में जानकारी

     एवोकाडो एक फल हे। जो एलिगेटर नाशपती के रूप में भी जाना जाता हे। इस फल की ऊपरी परत काफी मोटी होती हे जो हल्के हरे रंग की होती हे। इस फल में एक बड़ा बीज भी होता हे। एवोकाडो फल एवोकाडो नामक पेड़ से आता हे। इस फल को हिंदी में मक्खन फल भी कहा जाता हे। जो करीबन 65 फिट तक लम्बा होता हे। पहले एवोकाडो सिर्फ पूएब्ला और मैक्सिको में ही उगता था और वही मिलता था मगर इसके विभिन्न स्वास्थ लाभों के कारण यह फल अब कई देशो में उगाया जाने लगा हे। एवोकाडो फल को कच्चा ही खाते हे और यह स्वाद में खट्टा मीठा होता हे। इस फल को ज्यादातर लोग मिल्कशेक या आइसक्रीम बनाने में प्रयोग किया जाता हे।

      एवोकाडो फल में कई तरह में पोषक तत्व भी पाए जाते हे। जैसे की विटामिन A, C, D, E, K , पोटैशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस, कॉपर, मैग्नेशियम, फाइबर, प्रोटीन आदि। जो हमारे शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद होते हे। 

एवोकाडो के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स

1. एवोकाडो पुरे विश्व में उष्णकटिबंधीय और भूमध्य जलवायु में इसकी खेती की जा सकती हे। 

2. विश्व में एवोकाडो की 500 से अधिक किस्मे देखने को मिल जाती हे। 

3. एवोकाडो फल एलिगेटर नाशपती के रूप में भी जाना जाता हे। 

4. एवोकाडो फल को हिंदी में मक्खन फल भी कहा जाता हे। 

5. सबसे पहले एवोकाडो को पूएब्ला और मेक्सिको में उगाया गया था। 

6. यह फल स्वाद में खट्टा मीठा होता हे। 

7. एवोकाडो फल में कई तरह के पोषक तत्व भी पाए जाते हे।

8. इस फल को ज्यादातर लोग मिल्कशेक और आइस्क्रीम बनाने के लिए प्रयोग करते हे।

9. एवोकाडो को मगरमच्छ नाशपती भी कहा जाता हे।

एवोकाडो खाने के फायदे

1. आँखों के लिए फायदेमंद

    एवोकाडो आँखों के लिए बहोत ही अच्छा होता हे। इसमें विटामिन ए पाया जाता हे। जो आँखों की रौशनी को तेज करता हे। इसका प्रयोग फ्री रेडिकल्स से भी छुटकारा दिलाते हे। यह आँखों से स्ट्रेस को भी कम कर देता हे। और दर्द से भी आराम दिलाता हे। 

2. हड्डियों के लिए फायदेमंद

    हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए आप अपनी डाइट में एवोकाडो को शामिल कर सकते हे। एवोकाडो में कैल्शियम, प्रोटीन और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हे जो हड्डियों को कमजोर होने से बचा सकता हे। 

3. वजन कम करने के लिए

     अगर आप अपने वजन को कम करना चाहते हे तो एवोकाडो को अपनी डाइट में जरूर शामिल करे। एवोकाडो फाइबर से भरपूर जो आपके डाइजेशन की प्रक्रिया को धीमा कर पेट को भरे रखता हे। जिससे आपको जल्दी भूख नहीं लगती। और आपके शरीर में एनर्जी लेवल भी बना रहता हे। एवोकाडो न्यूट्रिशन का भंडार हे इसमें शरीर के लिए जरुरी बी विटामिन भी मिलते हे। साथ ही यह बेली फैट भी घटाने में मदद करता हे। 

4. मौखिक स्वास्थ्य

     एवोकाडो खाने से आप ख़राब साँस को रोक सकते हे। जो की मुख्य रूप से अपच और परीशान पेट के कारण होता हे। पाचन तत्र के सुधार के द्वारा मुँह से दुर्गन्ध का सफाया किया जा सकता हे। और एवोकाडो में पाए जाने वाले जीवाणुरोधी और एंटीओक्सिडेंट फलोनोइज आपके मुँह में बेक्टेरिया को भी मार देते हे। जिससे ख़राब साँस बंद हो सकती हे। इसके अलावा एवोकाडो मौखिक कैंसर से भी बचाव कर सकता हे।

5. हदय स्वस्थ

     एवोकाडो एक मोनोसेन्चुरेडेट फल हे। इसके अच्छे फैक्ट्स शरीर में बेड कोलेस्ट्रोन को कम करते हे। इससे ब्लड प्रेशर नियत्रित रहता हे। ऐवकाडो के बी विटामिन हार्ट स्टॉक, हार्ट फेलेरियर और अन्य हदय रोग से बचाते हे। मैग्नेशियम भी हदय को स्वस्थ और मेंटेन रखने में मदद करता हे। एवाकाडो खाने से शरीर में ब्लड फ्लो बहेतर होता हे।

एवोकाडो खाने के नुकशान

1. वजन बढ़ना

      एवोकाडो में कम कैलोरी के कारण यह वजन कम करने के लिए सहायक होता हे। लेकिन इसमें फैट की अच्छी मात्रा भी होती हे। इसलिए इसका अधिक सेवन वजन बढ़ाने का काम भी कर सकता हे। इसलिए मोटापे से ग्रसित लोगो को इसके अधिक सेवन से बचना चाहिए।

2. पेट हो सकता हे ख़राब

    ज्यादा मात्रा में एवोकाडो का सेवन करने से पेट ख़राब हो सकता हे, पेट में जलन होती हे जिसकी वजह से गैस्ट्रोइंटेस्टनल इरिटेशन होती हे। इसलिए एवोकाडो का अधिक सेवन से बचना चाहिए।

3. त्वचा की एलर्जी

     एवोकाडो के सेवन से कुछ लोगो को कई सारी एलर्जी हो सकती हे। जैसे की एक्जिमा, खुजली, लालिमा आदि हो सकता हे। इसलिए जिन लोगो को एलर्जी की समस्या हे उन्हें एवोकाडो खाने से बचना चाहिए।

एवोकाडो की खेती की जानकारी 

एवोकाडो फल की खेती के बारे में जानकारी

1. जलवायु

     एवोकाडो दक्षिण अमेरिकी उपमहाद्वीपीय का पौधा हे। जिस वजह से इसके पौधे को उष्ण कटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती हे। 20 से 30 तापमान वाले क्षेत्र जहा पर 60 फीसदी तक नमी पायी जाती हे। वहा इसकी पैदावार अच्छी प्राप्त होती हे। इसके पौधे ठंडी में 5 डिग्री तक के तापमान को आसानी से सहन कर लेते हे। किन्तु 5 डिग्री से कम तापमान होने पर पौधा ख़राब होने लगते हे। इसको भारत में तमिलनाडु और केरल में मुख्य रूप से उगाया जाता हे।

2. मिट्टी

     लेटेराइट मिट्टी में अधिक मात्रा में चिकनाई पायी जाती हे जिस वजह से लेटेराइट भूमि एवोकाडो की खेती के लिए उपयुक्त होती हे। भारत में इसकी खेती पच्छिम बंगाल, केरल, उड़ीसा, तमिलनाडु, हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों में इसकी खेती आसानी से कर सकते हे। इसके पौधो को 50 से 60 प्रतिशद नमी की जरूरत होती हे।

3. एवोकाडो की उन्नत किस्मे

      विश्व में एवोकाडो की कई तरह की किस्मे दिखने को मिल जाती हे जैसे की फ्रुएंट, पिकटर्न, हेंस, पर्पल, पोलक, ग्रीन, राउंड, ट्रैप, लॉन्ग, फुएरते आदि। जिसमे से आपको अपनी बाग़बानी के लिए तय करना होता हे और जो तय करे उसका पौधा नर्सरी में तैयार करवलिया जाता हे।

4. खेती की तैयारी

     सबसे पहले खेत की गहरी जुताई कर खपतवार को निकाल दिया जाता हे। इसके बाद खेत में पानी लगाकर पलव कर देते हे। बाद में उसमे रोटावेटर लगाकर मिट्टी भुरभुरी हो जाती हे। बाद में भुरभुरी मिटटी को पाटा लगाकर समतल कर लिया जाता हे। फिर समतल खेत में गड्डो को तैयार कर लिया जाता हे। इसके बाद गड्डो में मिट्टी के साथ अनुपात खाद्य को मिट्टी में मिलाकर गड्डो में भर दिया जाता हे।

5. पौधो की रोपाई

     नर्सरी से एवोकाडो के पौधे स्वस्थ देखकर लाना चाहिए बादमे उन गड्डो में छोटे छोटे गड्डे करके उसमे पौधो को रोप दिया जाता हे मगर पौधे रोपने के पहले किये गए गड्डो को गौमूत्र से उपचारित कर लिया जाता हे। पौधा रोपने के बाद अच्छी तरह से मिट्टी से दबा दिया जाता हे।

6. पौधे को सिंचाई

     एवोकाडो के पौधो को नमि की जरूरत होती हे। इसलिए खेत की पहली सिंचाई पौधे रोपाई के तुरंत बाद की जाती हे। इसके बाद शुष्क और गर्म जलवायु में पौधे को 3 से 4 सप्ताह में पानी देना होता हे। और सर्दियों के मौसम में 2 से 3 बार पानी देना होता हे और बारिश के मौसम में पौधे को जरूरत पड़ने पर पानी देना होता हे। एवोकाडो के पौधे को ड्रिप विधि सबसे अच्छी विधि मानी जाती हे।

7. पौधे पर रोगथाम

     एवोकाडो के पौधे पर कई तरह के रोग दिखने को मिल जाते हे जैसे की स्केल्स, मेलबग्स, माइट्स और सामान्य किट, पत्ती का धब्बा, जड़ सड़न आदि रोग दिखने को मिल जाते हे। जिसका बचाव करने के लिए कृषि विभाग से सपर्क करे और रोग सबंधित दवाइयों का इस्तेमाल करे। 

8. फलो की तुड़ाई 

     एवोकाडो फल पौधा रोपाई के 5 से 6 वर्ष पाच्यात तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हे। एवोकाडो के फल बैगनी रंग के होते हे। पूर्ण रूप से तैयार एवोकाडो के फल का बीज पिले सफ़ेद से गहरे भूरे रंग का हो जाता हे। बाद में उन्हें बॉक्स में पैक करके बाजार भेज दिया जाता हे।

अक्शर पूछे जाने वाले सवाल

1. एक दिन में कितने एवोकाडो खाया जा सकता हे ?

एक दिन में आधा एवोकाडो खाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता हे। 

2. एवोकाडो को हिंदी में क्या कहा जाता हे ?

एवोकाडो में हिंदी में मक्खन फल कहा जाता हे। 

3. सबसे पहले एवोकाडो को कहा उगाया गया था ?

सबसे पहले एवोकाडो को पूएब्ला और मेक्सिको में उगाया गया था। 

4. एवोकाडो की विश्व में कितनी किस्मे हे ?

विश्व में एवोकाडो की करीबन 500 किस्म दिखने को मिल जाती हे। 

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रविवार, 26 जून 2022

बादाम के बारे में जानकारी | Almond Fruit In Hindi

    हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। तो आज हम इस आर्टिकल में बात करने वाले हे बादाम के बारे में जानकारी, अमेजिंग फैक्ट्स, बादाम खाने के फायदे और नुकशान, बादाम की खेती और faq तो उम्मीद हे की आपको यह हमारा आर्टिकल पसंद आयेंगा। तो चलो देखते हे बादाम के बारे में...

बादाम के बारे में जानकारी     

बादाम के बारे में जानकारी

      बादाम एक फल होता हे। जिसका वैज्ञानिक नाम प्रूनुस डल्शिंस हे। जो आड़ू परिवार का हे। वो आड़ू की तरह ही दीखता हे और उसे भी आड़ू की समकुल परिस्थिति में उगाया जाता हे। बादाम एशिया के भारत और जापान जैसे देशो में खूब उगाया जाता हे। जो पूरी दुनिया में काफी मशहूर फल माना जाता हे। बादाम का बीज स्वाद में बहोत ही मीठा होता हे। बादाम पर भूरे रंग की परत होती हे जिसे छिले या बिना छिलके खाते हे। सूखा मेवा बादाम खाने का सबसे अच्छा तरीका उसका छिलका उतारकर खाना हे। बादाम को रात में पानी के अंदर भिगोकर रख देते हे और सुबह होते हे इसका छिलका नरम पड़ जाता हे जिससे छिलका आसानी से उतर जाता हे। बादाम फल दुनिया के कई देशो में पाया जाता हे जैसे की ईरान, अमेरिका, स्पेन, अर्ब जैसे देशो में इसकी खेती देखने को मिल जाती हे। भारत में जम्मू कश्मीर के इलाको में इसकी खेती देखने को मिल जाती हे। 

     बादाम एक ऐसा फल हे जिसे सीधे भी खा सकते हे और उसका हलवा भी बनाया जा सकता हे और कई तरह की मिठाइयों में भी इसका उपयोग किया जाता हे। और बादाम को दूध में डालकर भी पि सकते हे। वैसे तो बादाम हमारे शरीर के लिए बहोत ही लाभदायक फल होता हे। बादाम में कई तरह के पोषक तत्व भी पाए जाते हे जैसे की विटामिन ए, बी, इ और इसके अलावा कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नेशियम, फास्फोरस, जिंक, आयरन, फाइबर आदि कई मात्रा में पाए जाते हे। जो हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हे।

बादाम के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स

1. भीगे हुए बादाम रक्तचाप को नियत्रित करने में मदद करते हे। 

2. बादाम का वैज्ञानिक नाम प्रूनुस डल्शिंस हे। 

3. बादाम को ड्राईफूट का राजा कहा जाता हे। 

4. दुनिया के 80% बादाम कैलिफोनिया में उगाये जाते हे। 

5. बादाम में सबसे लोकप्रिय किस्म नॉनपेरिल हे। 

6. बादाम में काफी मात्रा में फाइबर पाया जाता हे जो पाचन क्रिया को बढ़िया बनाता हे। 

7. बादाम में कई तरह के पोषक तत्व भी पाए जाते हे जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होते हे।

8. भारत में बादाम की खेती जम्मूकश्मीर के इलाको में की जाती हे।

9. बादाम पूरी दुनिया का काफी मशहूर फल माना जाता हे।

बादाम खाने के फायदे

1. त्वचा के लिए उपयोगी

    अगर खाली पेट बादाम का सेवन किया जाये तो त्वचा स्वस्थ हो सकती हे। ऐसा इसलिए क्योकि बादाम में एंटी इम्फेमेट्री गुण मौजूद होते हे जो न केवल ड्राई स्किन की समस्या को दूर कर सकते हे बल्कि सोरायसिस एग्जिमा जैसी समश्याओ से राहत दिलाने में भी उपयोगी हे। 

2. आँखों के लिए 

    बादाम आँखों में होने वाली कमजोरी को दूर करने में फायदेमंद होती हे। बादाम में विटामिन इ और जिंक की भरपूर मात्रा पाई जाती हे। ये पोषक तत्व आँखों से जुडी बीमारी एज रिलेटेड मेक्युलर डिजनरेशन को दूर करने का काम कर सकते हे। साथ ही बादाम में जिंक होता हे जो रेटिना को स्वस्थ रखने के लिए जरुरी माना जाता हे। इसलिए कहा जाता हे की बादाम आँखों के लिए काफी फायदेमंद होती हे।

3. पोषक तत्वों से समृद्ध

    बादाम कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता हे। जो स्वास्थ के लिए लाभकारी होता हे। इसमें मुख्य रूप से प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, जिंक, विटामिन्स और फोलेट जैसे पोषक तत्व होते हे। यह सभी पोषक तत्व हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होते हे। 

4. शरीर में बढे ऊर्जा

     बादाम में प्रोबायोटिक्स और फायबर आदि महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हे। जो न केवल शरीर में ऊर्जा बनाये रखने में मददगार हे बल्कि यह सुस्ती, थकान आदि को दूर भी रख सकते हे। भिगोये हुए बादाम का सेवन शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता हे।

5. वजन कम होना

     अगर आप तेजी से अपना वजन कम करना चाहते हे तो भीगे हुए बादाम का सेवन करना चालू कर दो। खाने के बिच में बादाम चबाने से बार बार भूख लगना बंध हो जाता हे। जिससे आपका वजन कम होता हे।

बादाम खाने के नुकशान

1. कब्ज की समस्या

     बादाम का अधिक सेवन से लोगो को पेट सबंधी कई दिक्क़ते होती हे। इन में कब्ज भी शामिल हे बादाम को पचाने के लिए हाइड्रेड रहना जरुरी होता हे। जो पानी कम पीते हे उन्हें ज्यादा बादाम खाने पर कब्ज की शिकायत होने लगती हे। हालाँकि पानी पीना सेहत के लिए अच्छा होता हे। 

2. वजन बढ़ सकता हे

     बादाम का अधिक सेवन से वजन बढ़ सकता हे। क्योकि बादाम में कैलोरी और फैट की मात्रा अधिक होती हे। अगर आप उतनी कैलोरी बर्न नहीं करते हे तो आपका वजन बढ़ सकता हे। क्योकि एक्स्ट्रा कैलोरी आपके शरीर को मोटा बना देती हे। शरीर के लिए 2000 कैलोरी आवश्यक होती हे। अगर आपको वजन घटाना हे तो बादाम का अधिक सेवन से बचे। 

बादाम की खेती के बारे में जानकारी

बादाम की खेती के बारे में जानकारी

1. बादाम की खेती का समय

    बादाम के पौधो की रोपाई नवंबर और दिसम्बर महीने के मध्य करना अच्छा माना जाता हे। क्योकि इस दौरान वातावरण पौधो के अनुकूल बना रहता हे जिससे पौधे अच्छे से विकास भी करते हे। 

2. जलवायु

     बादाम की खेती के लिए आद्र उष्णकटिबंधीय जलवायु को उपयुक्त माना जाता हे। भारत में बादाम के पेड़ो को कश्मीर जैसे ठन्डे राज्यों में उगाया जाता हे। इसके पौधे और फल दोनों ही ठंडी जलवायु में अच्छे से विकास करते हे। पौधे को अंकुरित होने के लिए 20 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती हे। बादाम के पौधे फूल खिलने के दौरान 2 डिग्री तापमान को भी सहन कर सकते हे। 

3. मिट्टी

     बादाम की खेती के लिए समतल, बलुई दोमट, चिकनी मिट्टी और गहरी उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती हे। इसकी खेती के लिए इस बात का विशेष ध्यान रखे की जिस खेत में इसकी खेती की जा रही हे उसमे जल निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। 

4. खेत की तैयारी

      बादाम की खेती के लिए खेत को सबसे पहले अच्छी तरह से जुताई कर देनी चाहिए। इसके बाद कल्टीवेटर चलाकर खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई की जाती हे। बाद में खेत को समतल किया जाता हे। खेत को समतल करने के बाद प्रत्येक 5 से 8 मीटर की दुरी रखते हुए आधे मीटर गड्डो को तैयार कर ले। बाद में गड्डो को पुरानी गोबर की खाद्य में रासायनिक उवर्रक की उचित मात्रा में मिलाकर गड्डो में अच्छी तरह से भर दिया जाता हे। यह गड्डे पौधे रोपाई से एक महीने पहले तैयार कर लिया जाता हे। 

5. बादाम की उन्नत किस्मे

     बादाम की कई तरह की किस्मे दिखने को मिल जाती हे। जैसे की निप्लस अल्ट्रा किस्म, नॉन पेरिल किस्म, फेसियोनेलो किस्म, पीयरलेस किस्म, कैलिफोनिया किस्म, मामरा किस्म आदि हे इसमें से आपको अपनी बागबानी के लिए जो किस्म तय करना हो वो कर सकते हे। बाद में उस किस्म को नर्सरी में खेती के दो महीने पहले तैयार करवालिया जाता हे।

6. बादाम के पोधो की रोपाई 

      बादाम के पौधो को खेत में एक महीने पहले तैयार किये गए गड्डो में लगाया जाता हे। यह पौधे बिलकुल स्वस्थ और शाखाओ युक्त होने चाहिए। पौधो को तैयार किये गए गड्डो में एक छोटा सा गड्डा करके लगाया जाता हे। पौधो को लगाने से पहले गड्डो के अंदर बनाये गए इस गड्डो को गौमूत्र से उपचारित करना होता हे। जिसके कारण पौधा अच्छे से विकास करे। इसके बाद पौधो को उन गड्डो में लगा दे और अच्छे से मिट्टी से दबा देना चाहिए।

7. पौधे को सिंचाई

    बादाम के पौधे को शरुआत में सिंचाई की आवश्यकता होती हे बाद में कम हो जाती हे। गर्मियों के मौसम में सप्ताह में दो बार तथा सर्दियों के मौसम में एक बार पानी देना होता हे। पौधे को पूर्ण रूप से विकशित होने में वर्ष में 5 से 8 सिंचाई की आवश्यकता होती हे। बादाम के पौधो में टपक सिंचाई सबसे अच्छी विधि मानी जाती हे।

8. पौधे पर लगने वाले रोग

    बादाम के पौधे में कुछ तरह के ही रोग दिखने को मिल जाते हे। जैसे की पत्ती धब्बा रोग, जड़ सड़न रोग, किट आक्रमण आदि रोग दिखने को मिल जाते हे। यह रोग फसल में न आये इसलिए रोजाना फसल की देखभाल करते रहना चाहिए। और रोग फसल में दिखे तो तुरंत ही उसका इलाज कर देना चाहिए।

9. फलो की तुड़ाई

     बादाम के पौधे 5 से 7 साल बाद फसल देना आरम्भ कर देते हे। पौधे पर फूल लगने के बाद 8 महीने बाद फल पककर तैयार हो जाते हे। बादाम के फलो को उनके पूरी तरह से पक जाने के बाद पतझड़ के मौसम में फल की तुड़ाई की जाती हे। और फल की तुड़ाई बाद इन्हे अच्छे से पैक करके बाजार में भेज दिया जाता हे।

अक्शर पूछे जाने वाले सवाल

1. बादाम फल का वैज्ञानिक नाम क्या हे ?

बादाम फल का वैज्ञानिक नाम प्रूनुस डल्शिंस हे। 

2. बादाम भारत में कहा पाया जाता हे ?

बादाम भारत में जम्मूकश्मीर के इलाको में पाए जाते हे। 

3. एक दिन में कितने बादाम खाने चाहिए ?

एक दिन में 3 से 4 बादाम खाना शरीर के लिए फायदेमंद हे। 

4. बादाम खाने का सही समय क्या है ?

बादाम खाने का सही समय सुबह खाली पेट हे। जो बहोत ही फायदेमंद माना जाता हे। 

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खुबानी के बारे में जानकारी   

खुबानी फल के बारे में जानकरी

     खुबानी एक फल हे जो मीठा और खट्टा होता हे। और खाने में बहोत स्वादिस्ट लगता हे। खुबानी फल गोल आकार में और नारंगी रंग होता हे लेकिन कभी कभी पिले रंग का भी होता हे। खुबानी का छिलका मुलायम होता हे जिसे वो आसानी से छिला जा सकती हे। खुबानी को कच्चा भी खाया जाता हे और सूखे मेवे के रूप में भी खाया जा सकता हे। यह फल भारत में करीबन 5000 हजार सालो से उगाया जा रहा हे। आड़ू का पेड़, आलू बुखारा और खुबानी का फल यह तीनो एक ही वंश के माने जाते हे। भारत में खुबानी की भरपूर पैदावार होती हे। इस फल की सर्वप्रथम खेती आर्मेनिया में मानी जाती हे। 

     खुबानी फल में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हे। जैसे की विटामिन ए, बी, सी, इ, के आदि। इसके अलावा पोटैशियम, मैग्नेशियम, कैल्शियम, कॉपर, फॉस्फोरस, खनिज, आयरन, एंटीओक्सिडेंट, फाइबर आदि अधिक मात्रा में पाए जाते हे। जो हमारे शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद होते हे।

खुबानी के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स

1. खुबानी फल स्वाद में मीठा और खट्टा होता हे। 

2. खुबानी फल भारत में करीबन 5000 सालो से उगाया जा रहा हे। 

3. इस फल की सर्वप्रथम खेती आर्मेनिया में की गई थी। 

4. खुबानी फल में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हे। 

5. खुबानी में विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता हे जो आँखों के लिए बहोत फायदेमंद होता हे। 

6. खुबानी फल मीठा और गर्म तासीर वाला होता हे। 

7. खुबानी का सेवन करने से प्रतिरोधक श्रमता बढ़ती हे।

खुबानी खाने के फायदे

1. सूजन के लिए

    खुबानी का सेवन सूजन कम करने के लिए किया जा सकता हे। खुबानी में एंटी-इन्फेमेटरी गुण होता हे। यह गुण सूजन को कम करने के लिए जाना जाता हे। खुबानी के अलावा उसके बीज के अंदर का खाद्य हिस्सा पेट की सूजन को कम कर सकता हे। 

2. आँखों के लिए

     सूखे खुबानी में एंटीऑक्सीडेंट, बीटा कैरोटीन का उच्च स्तर पाया जाता हे। जो हमारी आँखों में ऑप्टिक नसों को मजबूत करने और आपके नेत्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता हे। यह विटामिन ए, सी और ई के साथ साथ कैरोटिनॉइड में भी समुद्र हे जो नेवस्कुलर एज से सबंधित मैक्युलर डिग्नेशन और मोतियाबंधी के जोखिम को कम करते हे। 

3. कान दर्द से राहत

    कई लोगो को कभी कभी कान दर्द होने लगता हे। खुबानी कान दर्द से राहत दिलाने में काफी लाभकारी होता हे। खुबानी के बीज का तेल 1-2 बून्द कान में डालने से कान दर्द से राहत मिलती हे।

4. बालो के लिए

    हमारे शरीर के बाल आयरन की कमी के कारण झड़ने लगते हे। जिसकी वजह से हम धीरे धीरे गंजे होने लगते हे। खुबानी के अंदर समृद्ध मात्रा में आयरन पाया जाता हे जो हमारे बाल झड़ने से रोक सकता हे। अगर आप रोजाना खुबानी का सेवन करते हे तो आपके बाल काफी मात्रा में गिरना कम हो जाते हे। 

5. स्वास्थ्य में सुधार

   खुबानी में फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता हे। जो हमारे शरीर में ख़राब कोलेस्ट्रोन को कम करने में मदद करता हे। जिससे आपका स्वास्थ बहेतर होता हे। इसके अलावा इसमें मौजूद पोटैशियम हमारे सिस्टम में इलेक्ट्रोलाइट के स्तर को संतुलित करती हे। जिससे हमारी हदय की मांसपेशिया सही तरिके से काम करती हे।

खुबानी खाने के नुकशान

खुबानी वैसे तो सभी लोगो के लिए फायदेमंद ही होती हे मगर ज्यादा सेवन करने से नुकशान भी होता हे इसलिए खुबानी का सेवन कम मात्रा में करना ही फायदेमंद हे। 

1. खुबानी के अधिक सेवन से टॉक्सिक इफेक्ट भी हो सकता हे। बताया जाता हे की खुबानी के सेवन से बच्चो को विषाक्तता हो सकती हे। 

2. अगर आप साँस की बीमारी से गुजर रहे हे तो इससे दूर रहे क्युकी सल्फाइड से आपको नुकशान हो सकता हे। ऐसा होने से आपको साँस लेने में बीमारी या फिर एलर्जी हो सकती हे।

खुबानी की खेती की जानकारी

खुबानी फल की खेती के बारे में जानकारी

1. खेती करने का समय

   खुबानी का पौधा रोपाई मार्च, जुलाई और अगस्त के महीने तक कर सकते हे। जहा सिंचाई की उचित व्यवस्था हो वहा पोधो को मार्च के महीने में लगाए। असिंचित जगहों पर पौधो को जून के महीने में लगा सकते हे। इस दौरान बारिश का मौसम होता हे जिससे पौधो को विकास करने के लिए उचित माहौल मिल जाता हे। 

2. जलवायु

   खुबानी की खेती के लिए समशीतोष्ण और शीतोष्ण जलवायु वाली जगह अच्छी होती हे। इसके पौधे अधिक गर्मी के मौसम में विकास नहीं कर पाते हे। जब की सर्दी के मौसम में आसानी से विकास कर लेते हे। इसके पौधो को अधिक बारिश की जरूरत नहीं होती। फूल खिलते वक्त बारिश या अधिक ठण्ड का होना इसके लिए उपयुक्त नहीं होता।

3. खुबानी की खेती के लिए मिट्टी

    खुबानी के पौधे को उचित जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी की जरूरत होती हे। मगर बलुई दोमट मिट्टी खुबानी की खेती के लिए उपयुक्त  मानी जाती हे। जलभराव और कठोर भूमि में इसकी खेती बिलकुल न करे। 

4. खुबानी की उन्नत किस्मे

    खुबानी की कई तरह की किस्मे दिखने को मिल जाती हे। जैसे की कैशा, गौरव लाल गाल खुबानी, काला मखमल, मेलिटोपोल ब्लेक, अनानास खुबानी, चारमग्ज, ब्लेक प्रिंस, सफेदा आदि। इसमें से आपको अपनी बागबानी के लिए पसंद करना होता हे। और बाद में जो पसंद की उसे नर्सरी में तैयार करवालिया जाता हे।

5. खेत की तैयारी

   खुबानी की खेती के लिए सबसे पहले खेत को साफ कर मिट्टी पलटने वाले हलो से खेत की गहरी जुताई की जाती हे। जिसके बाद रोटावेटर से जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा कर देते हे। भुरभुरी मिट्टी को समतल करने के लिए खेत में पाटा लगा दे। इससे बारिश के मौसम में खेत में जलभराव नहीं होता। बाद में समतल भूमि में 5 से 6 मीटर की दुरी रखते हुए गड्डे तैयार किये जाते हे। 

   उसके बाद उस गड्डो में रासायनिक और जैविक उवर्रक की उचित मात्रा को मिट्टी में मिलाकर गड्डो में भरना होता हे। गड्डे भरने के पच्यात उनकी गहरी सिंचाई की जाती हे। ताकि गड्डे मे मिट्टी ठीक से बैठकर कठोर हो जाये। इन गड्डो को पौधा रोपाई के तीन माह पहले कर दे।

6. पौधो की रोपाई

    खुबानी के पौधो को खेत में तैयार गड्डो में लगाया जाता हे। इनके लिए गड्डो के मध्य में एक छोटा सा गड्डा तैयार कर लेते हे। गड्डे तैयार करके उसमे गौमूत्र से उपचारित करते हे। बाद में उस गड्डो में पौधो को लगा लिया जाता हे। 

7. पौधो की सिंचाई

    खुबानी को गर्मियों में अधिक पानी की आवश्यकता होती हे। जिन क्षेत्रों में गर्मियों में वर्षा 150 सेंटीमीटर से अधिक होती हे वहा सिंचाई की आवश्यकता कम होती हे। गर्मियों के मौसम में पौधो को तिन से चार बार पानी देना होता हे 7 से 9 दिन के अंतर्गत। और सर्दियों के मौसम में 20 से 25 दिन के अंतर्गत पौधो को पानी देना होता हे। और बारिश के मौसम में जरूरत पड़ने पर सिंचाई की जाती हे। खुबानी के पौधो को सिंचाई के लिए ड्रिप विधि सबसे अच्छी मानी जाती हे। 

8. रोग

    खुबानी के पौधो पर कई तरह के रोग दिखने को मिल जाते हे। जैसे की मोनिलियल बर्न, ग्रे संड़ाध, इंडियन जिप्सी मोथ, पर्ण चित्ती, पत्ती मरोड़ आदि। यह रोग पौधे पर न आये इसलिए पौधे की रोजाना देखभाल करते रहना चाहिए। ताकि पौधे पर कोई रोग दिखे तुरंत ही इसका इलाज हो जाये।

9. फलो की तुड़ाई

    खुबानी के पौधे रोपाई के तकरीबन 3 से 4 वर्ष बाद पैदावार देना आरम्भ करते हे। इसके पौधो पर फल पूर्ण रूप से पकने से पहले तोड़ ले। ताकि फल अधिक दुरी तक भेजा जा सके। खुबानी के फलो का रंग किस्मो के आधार पर भिन्न भिन्न होता हे। जब इसका फल नरम हो जाये तब फलो की तुड़ाई कर ले। बाद में फलो को अच्छे बॉक्स में पैक करके बाजार भेज दिया जाता हे।

अक्शर पूछे जाने वाले सवाल

1. खुबानी का पेड़ कैसा होता है ?

खुबानी का पौधा सामान्य ऊंचाई का और फल पिले, सफ़ेद, काले, गुलाबी और भूरे होते हे। 

2. खुबानी का अर्थ क्या है ?

खुबानी वनस्पति-विज्ञानं के नजरिये से आलू बुखारा और आड़ू के वनस्पति परिवार का फल हे। 

3. एक दिन में कितनी खुबानी खानी चाहिए ?

एक दिन में 3 से 4 खुबानी खाना ही फायदेमंद होता हे। 

4. क्या खुबानी का सेवन रात को किया जा सकता है ?

खुबानी का सेवन दिन में ज्यादा फायदेमंद होता हे लेकिन रात के समय भी इसका सेवन किया जा सकता हे।

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गुरुवार, 23 जून 2022

बेल फल के बारे में जानकारी | Wood Apple Information In Hindi

    हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। तो आज हम इस आर्टिकल में बात करने वाले हे बेल फल के बारे में जानकारी, अमेजिंग फैक्ट्स, बेल खाने के फायदे और नुकशान, बेल की खेती और faq तो उम्मीद हे की आपको यह हमारा आर्टिकल पसंद आयेंगा। तो चलो देखते हे बेल फल के बारे में।

बेल फल के बारे में जानकारी    

बेल फल के बारे में जानकारी

     बेल हमारे भारत में काफी प्रसिद्ध फल माना जाता हे। यह आकार में गोल तथा अंडाकार होता हे। बेल कच्चा हरा रंग का और पक्का पिले रंग का होता हे। इसके ऊपर की छिलके काफी कठोर एव मोटी होती हे। और इसके अंदर का भाग हल्के पिले रंग का गुदा पाया जाता हे। जिसे कई प्रकार से सेवन किया जाता हे। बेल दक्षिण भारत से लेकर उत्तर तक पाया जाता हे। इसके अलावा यह बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्री लंका, जावा, मलेशिया आदि देशो में पाया जाता हे। बेल के पेड़ कांटेदार होते हे जिस पर फूल लगते हे बाद में फूल ही फल के रूप में विकसित होते हे। पेड़ पर फल लगने के दौरान पत्ते झड़ जाते हे। बेल को दो भाग में विभाजित किया जा सकता हे। पहले छोटे बेल होते हे वो स्वाद में बहोत खट्टे होते हे साथ ही गले पर भी असर करते हे। और दूसरे बेल बड़े आकार में होते हे इसका गुदा खट्टापन के लिए मीठा होता हे। 

     इस फल में कई तरह के पोषक तत्व भी पाए जाते हे। जैसे की विटामिन ए, बी, सी, कैल्शियम, मैग्नेशियम, फास्फोरस, फाइबर, प्रोटीन आदि। जो हमारे शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद माना जाता हे। बेल में बीटा कैरोटीन नामक तत्व भी मिलता हे।

बेल के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स

1. बेल भारत का प्रसिद्ध फल माना जाता हे। 

2. बेल भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्री लंका, जावा, मलेशिया जैसे देशो में पाया जाता हे। 

3. बेल में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हे। 

4. बेल में विटामिन ए काफी मात्रा में पाया जाता हे जो हमारी आँखों के लिए फायदेमंद होता हे। 

5. बेल का पेड़ कांटेदार होता हे। जिस पर फूल भी देखने को मिल जाते हे। 

6. बेल की तासीर ठंडी होने के कारण इसका सेवन गर्मियों में ज्यादा होता हे। 

7. बेल का सेवन आप दिन में किसी भी समय कर सकते हे। 

बेल खाने के फायदे

1. लू से करे बचाव

    बेल का ज्यूस ही नहीं बल्कि बेल को रोस्ट करके खाने से भी लू की परिशानी को कम किया जा सकता हे। बेल में इम्युनिटी बूस्ट करने का गुण होता हे। साथ ही इससे आपके शरीर को ठंडक मिलती हे ऐसे में यह आपको लू जैसी समस्या से राहत दिलाने में प्रभावी हो सकता हे। 

2. आँखों के लिए 

    बेल का सेवन आँखों के लिए बहोत ही फायदेमंद माना जाता हे क्योकि बेल में विटामिन ए काफी मात्रा में पाया जाता हे जो आँखों की रौशनी को बहेतर करने में मदद करता हे।

3. कान दर्द से आराम

    रोजाना बेल का सेवन करने से कान में होने वाली समश्याओ से आराम मिलता हे। बेल का रोजाना सेवन करने से कान दर्द, कान से पानी आना जैसी समश्याओ से छुटकारा मिलता हे। 

4. गैस, कब्ज जैसी समस्या से आराम

    रोजाना बेल का सेवन शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद होता हे। बेल का सेवन करने से पेट में गैस, कब्ज जैसी बीमारियों से छुटकारा मिलता हे। अगर आपको गैस और कब्ज की समस्या हे तो आप अपनी डाइट में बेल को शामिल कर सकते हे।

5. पीलिया होने पर

    पीलिया होने का कारण लिवर में सूजन होना माना जाता हे। पीलिया होने पर बेल का सेवन करना एक अच्छा उपाय हे। बेल में एंटी इफ्लेमेंटरी गुण पाए जाते हे जो लिवर में होने वाली सूजन को कम कर पीलिया के उपचार में मदद कर सकते हे। 

बेल खाने के नुकशान

1. डायाबिटीज के मरीजों के लिए

    अगर आप डायाबिटीज के मरीज हे और बाजार में मिलने वाले बेल का शरबत का सेवन कर रहे हे तो जान ले की बेल के शरबत में शुगर की अधिक मात्रा आपके लिए नुकशानदायक हे। बेल खुद भी एक मीठा फल हे और इसका शरबत बनाने वाले लोग अक्शर थोड़ी मात्रा में चीनी मिला देते हे। इसलिए डायाबिटीज के मरीजों को बेल के शरबत का सेवन कम करना चाहिए।

2. गर्भवती महिलाओ को

    गर्भवती महिलाओ को बेल का शरबत का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योकि बेल के शरबत या ज्यूस के सेवन से गर्भपात का खतरा होता हे। इसके आलावा इसके सेवन से दूध पिलाने वाली महिलाओ मे दूध भी कम बनता हे।

3. पेट की समस्या

    बेल का अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में कई तरह की परिशानिया हो सकती हे। जैसे की पेट में दर्द, पेट फूलना, सूजन, कब्ज, पाचन आदि समस्याये हो सकती हे। इसलिए बेल का कम मात्रा में सेवन करना चाहिए।

बेल का ज्यूस बनाने का तरीका इस वीडियो में

बेल की खेती के बारे में जानकारी

बेल की खेती के बारे में जानकारी

1. बेल की खेती का समय

     बेल के पौधो की रोपाई किसी भी समय की जा सकती हे। किन्तु पौधो की रोपाई मई और जून के महीने में कर देना उपयुक्त माना जाता हे। मगर सिंचाई की जगहों पर इस पौधे को मार्च के महीनो में भी रोपाई की जा सकती हे।

2. जलवायु

    बेल का पौधा शुष्क और अर्धशुष्क जलवायु वाला होता हे। सामान्य सर्दी और गर्मी वाले मौसम में इसके पौधे अच्छे से विकास करते हे। किन्तु अधिक समय तक सर्दी का मौसम बने रहने और गिरने वाला पौधो को कुछ हानि पहुंचाता हे। इसके पौधो को वर्षा की जरूरत नहीं होती हे।

3. मिट्टी

     बेल एक बहोत ही सहनशील वृक्ष हे। इसे किसी भी मिट्टी पर उगाया जा सकता हे। परन्तु जल निकासयुक्त बलुई दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त माना जाता हे। इसको बंजर, कंकरीली, खादर, बीहड़ भूमि में भी इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती हे। वैसे तो बेल की खेती के लिए 6-8 पि एच मान वाली भूमि अधिक उपयुक्त होती हे।

4. बेल की किस्मे

     बेल की कई तरह की किस्मे देखने को मिल जाती हे। जैसे की गोमा यशी, पंत अर्पणा, सी आई एस एच बी, पंत सुजाता, पूसा उर्वशी आदि हे। इनमे से आपको अपने बागबानी में कौनसी किस्म लगानी हे ये आपको तय करना होता हे। और जो किस्म लगानी हे उसका पौधा नर्सरी में तैयार करवालिया जाता हे।

5. बेल की खेती की तैयारी

     बेल के पौधो की रोपाई गड्डो में की जाती हे। इसलिए गड्डो की तैयारी करने के लिए सबसे पहले खेत की गहरी जुताई की जाती हे। इसके बाद खेत को कुछ समय के लिए खुल्ला छोड़ दिया जाता हे। ताकि खेत को  अच्छी तरह से धुप लगे। इसके बाद खेत में तीन तिरछी जुताई की जाती हे। जुताई बाद खेत में पानी लगा दिया जाता हे। फिर पानी सूखने के बाद फिर जुताई की जाती हे बाद में खेत को समतल किया जाता हे। इस तरह खेत तैयार हो जाता हे। इसके बाद खेत में 6 मीटर की दुरी रखते हुए 1 फिट चौड़े और 1 फिट गहरे गड्डे किये जाते हे। इस गड्डो को तैयार करते समय उसमे रासायनिक और जैविक खाद्य को मिट्टी के साथ मिलाकर गड्डो में भर दिया जाता हे। 

6. पौधा रोपाई

     बेल के पोधो की रोपाई पौधे के रूप में की जाती हे। हमने जो गड्डे किये थे उनमे छोटे आकार के गड्डे करके पौधा रोपाई की जाती हे। बाद में उसे चारो और से मिट्टी से ढक दिया जाता हे। पौधो की रोपाई बाद इन्हे देखभाल करते रहना चाहिए। क्युकी कई पौधे सुक जाते हे इन्ही की जगह पर दूसरे पौधे लगा लेना चाहिए ताकि वो पौधे भी दूसरे पौधो की साथ ही तैयार हो जाये।

7. सिंचाई

     बेल के पौधे को अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती हे। इसकी पहली सिंचाई पौधे रोपाई के तुरंत बाद कर दी जाती हे। गर्मियों के मौसम में पौधे को 8 से 10 दिन के अंतर्गत पानी देना होता हे। तथा सर्दियों के मौसम में इसके पौधो को 15 से 20 दिन के अंतर्गत पानी देना होता हे। और बारिश के मौसम में पौधे को जरूरत पडने पर पानी देना होता हे। 

8. पौधो पर लगने वाले रोग

    बेल की फसल में भी कई तरह के रोग दिखने को मिल जाते हे। जैसे की बेल कैंकर, डाई बैंक, छोटे फलो का गिरना, पत्ती पर काला धब्बा, चितकबरी सुडी, सफ़ेद फंगल आदि। यदि इन रोगो का उपचार सही समय पर नहीं किया जाता तो पैदावार में अधिक हानि देखने को मिल जाती हे। 

9. फलो की तुड़ाई

    बेल का पौधा 6 से 7 साल बाद फल देना शुरू कर देता हे। जब इसके पौधो पर फल हरे, पिले रंग के दिखाई देने लगे तब फलो की तुड़ाई कर ले। फलो को उठाने-रखने में सावधानी का प्रयोग करे, नहीं तो फल गिरने के साथ ही इसमें दरार आ सकती हे। सभी फल एकत्रित करके बाजार भेज दिया जाता हे। 

अक्शर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या बेल को कच्चा खाया जा सकता है ?

हां बेल के गूदे को कच्चा खाया जा सकता हे। 

2. बेल की तासीर कैसी होती है ?

बेल की तासीर ठंडी होती हे। 

3. क्या रोजाना बेल का सेवन किया जा सकता है ?

दिन में एक कप बेल के ज्यूस का सेवन किया जा सकता हे।

4. बेल कहा कहा पाया जाता है ?

बेल भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्री लंका, जावा, मलेशिया आदि देशो में पाया जाता हे।

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बुधवार, 22 जून 2022

तरबूज के बारे में जानकारी | Watermelon Fruit In Hindi

    हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। तो आज हम इस आर्टिकल में बात करने वाले हे तरबूज के बारे में जानकारी, अमेजिंग फैक्ट्स, तरबूज खाने के फायदे और नुकशान, तरबूज की खेती और Faq तो उम्मीद हे की आपको यह हमारा आर्टिकल पसंद आयेंगा। तो चलो देखते हे तरबूज के बारे में...

 तरबूज के बारे में जानकारी

    

तरबूज के बारे में जानकारी

 तरबूज एक ग्रीष्म ऋतु का फल हे। जो आकार में और फलो में सबसे बड़ा होता हे। तरबूज कंदु और खीरे का रिस्तेदार हे। तरबूज का छिलका कठोर और हरे रंग का होता हे। तरबूज का आंतरिक आवरण गुदा के रूप में होता हे। इसी गूदे को खाया जाता हे। यह गुदा लाल रंग का और नरम होता हे। इस गूदा में हल्के काले रंग के बीज होते हे। जिसे सुखाकर भी खाया जाता हे। तरबूज की करीबन 1200 से अधिक किस्मे देखने को मिल जाती हे। तरबूज पानी से भरपूर मीठे होते हे। इसकी फसल आमतौर पर गर्मी में तैयार होती हे। विश्व में तरबूज का सबसे अधिक उत्पादन चीन में होता हे। पारमरिक रूप से इन्हे गर्मी में खाना अच्छा माना जाता हे। क्योकि यह पानी की कमी को पूरा करते हे। तरबूज में करीबन 97% पानी होता हे यह शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को पूरा करता हे।

     तरबूज में कई तरह के पोषक तत्व भी पाए जाते हे जो हमारे शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद होते हे। तरबूज में विटामिन ए, सी , कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, फाइबर, बीटा, केरोटीन, पोटैशियम, एंटीओक्सिडेंट, कैल्शियम, मैग्नेशियम और आयरन आदि पाए जाते हे।

तरबूज के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स

1. 96 देशो में 1200 से ज्यादा प्रकार के तरबूज उगाये जाते हे। 

2. तरबूज में 97% पानी होता हे जो शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को पूरा करता हे। 

3. विश्व में तरबूज का सबसे अधिक उत्पादन चीन में होता हे। 

4. तरबूज कंदु और खीरे का रिस्तेदार हे। 

5. तरबूज में कई तरह के पोषक तत्व भी पाए जाते हे। जो शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद होते हे। 

6. तरबूज सबसे पहले आफ्रिका में पाया गया था। 

7. तरबूज गर्मियों में हमारे लिए बहोत ही फायदेमंद होता हे। 

8. 1990 में बिल कैसन ने 262 पाउंड का तरबूज उगाया था जिसे गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रेकॉर्ड में शामिल किया था। 

9. तरबूज बहोत ही स्वादिस्ट फल होता हे। जिसकी वजह से यह पूरी  दुनिया में मशहूर हे।

तरबूज का ज्यूस बनाने का तरीका इस वीडियो में

तरबूज खाने के फायदे

1. पाचन शक्ति मजबूत करे

   पाचन शक्ति को मजबूती देने के लिए तरबूज आपकी मदद कर सकता हे। तरबूज में पानी की अधिकता होती हे और पानी भोजन पचाने में सबसे अहम तत्व माना जाता हे। इसमें फायबर भी पाया जाता हे जो पाचन तत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता हे। साथ ही साथ कब्ज और गैस जैसी समश्याओ से भी राहत मिलती हे।

2. हदय को स्वस्थ रखने के लिए

   कई लोगो को हार्ट अटैक मौत का कारण बन सकता हे। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या का समाधान किया जा सकता हे तरबूज में मौजूद पोषक तत्व हदय की सेहत के लिए फायदेमंद होते हे।  तरबूज में लाइकोपीन मौजूद होता हे जो ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रोन को कम करने में मदद करता हे। 

3. वजन कम करने के लिए

    तरबूज का रोजाना सेवन करने से शरीर का वजन घट सकता हे। क्युकी तरबूज में फाइबर और पानी की मात्रा भरपूर होती हे। ऐसे अगर आप इसका सेवन नाश्ते में करते हे तो यह आपके पेट को लम्बे समय तक भरा हुआ रखता हे। इसके अलावा इसमें कैलोरी की मात्रा भी काफी कम होती हे। तरबूज के इन्ही गुणों की वजह से रोजाना इसका सेवन करने से वजन कम हो सकता हे।

4. त्वचा और बालो के लिए

   तरबूज में विटामिन ए और विटामिन सी होता हे जो हमारी त्वचा और बालो के लिए काफी फायदेमंद होते हे। विटामिन ए जो आपकी त्वचा को मुलायम बनाता हे और साथ ही हमारे बालो को भी मजबूत बनाता हे। क्योकि वो त्वचा की कोशिकाओं को रिपेर करने में मदद करता हे।

5. पानी की कमी को पूरा करे

    कई लोगो को गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी हो जाती हे। जिसे निपटने के लिए तरबूज का सेवन बढ़िया विकल्प हे। तरबूज में पानी की मात्रा अधिक होती हे। जिसे खाने से हमारे शरीर में पानी अपूर्ति होती हे।

तरबूज खाने के नुकशान

1. ग्लूकोज का स्तर

    तरबूज में ग्लाइसेमिक इंडेक्स की मात्रा काफी पायी जाती हे। यही कारण हे की तरबूज का ज्यादा सेवन करने से शरीर में ग्लूकोज लेवल में इजाफा हो सकता हे। इसलिए मधुमेह रोगियों को तो तरबूज का सेवन नियत्रित मात्रा में करने की सलाह दी जाती हे।

2. पेट हो सकता हे ख़राब

    तरबूज का सेवन एक ही बार में अधिक कर लेने से पेट से सबंधित समस्या हो सकती हे। इस फल में डायटरी फाइबर की मात्रा अधिक होती हे जिसकी वजह से ज्यादा खाने से पेट दर्द की समस्या होती हे। इसके अलावा तरबूज में पानी की मात्रा भी ज्यादा होती हे तो इसे ज्यादा खाने से ओवर हाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती हे। इस फल को अधिक मात्रा में खाने से पाचन तंत्र सबंधित समश्याए जैसे की गैस, पेट फूलना, दस्त आदि समश्याए होती हे।

3. कितनी मात्रा में खाये तरबूज

     अगर आपको तरबूज बहोत पसंद हे तो आप आधा किलो ही तरबूज खाये। क्युकी तरबूज में शुगर और कैलोरी होता हे इसलिए अधिक सेवन से डायबिटीज के मरीजों को समस्या हो सकती हे। आप तरबूज को काटकर भी खा सकते हे और इसका ज्यूस बनाकर भी पि सकते हे।

तरबूज की खेती के बारे में जानकारी

तरबूज की खेती के बारे में जानकारी

1. तरबूज की खेती का समय

    तरबूज के बीजो की रोपाई के लिए मध्य फरवरी और मध्य मार्च के महीनो को उपयुक्त माना जाता हे। इस महीनो में खेती करने से किसानो को अधिक मात्रा में उत्पादन प्राप्त होता हे।

2. जलवायु

     तरबूच का पौधा शुष्क जलवायु वाला होता हे। जिस वजह से इसकी खेती कम आद्रता वाले प्रदेशो में आसानी से की जाती हे। इसका पौधा गर्म और सर्द दोनों ही जलवायु के प्रति सहनशील होता हे। किन्तु सर्दियों में गिरने वाला पौधा विकास के लिए हानिकारक होता हे। तरबूज के पौधे अधिकतम 39 डिग्री तथा न्युन्यतम 15 डिग्री तापमान को ही सहन कर सकते हे। 

3. मिट्टी

     तरबूज की खेती किसी भी उपजाऊ मिट्टी में की जा सकती हे। इसकी अच्छी पैदावार के लिए बलुई दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना जाता हे। क्योकि अम्लीय मिट्टी में तरबूज का उत्पादन अधिक मात्रा में होता हे।

4. तरबूज की किस्मे

    आज के समय में बाजार में तरबूज की कई तरह की प्रजातियां देखने को मिल जाती हे। जैसे की शुगर बेबी, पूसा बेदाना, आशायी यामातो, दुर्गापुरा केसर, उर्का ज्योति, अर्का मानिक आदि किस्मे हे। जिसमे से आपको जो किस्म की खेती करनी हे वो कर सकते हे।

5. खेती की तैयारी

     तरबूज के खेत की जुताई कर उसे अच्छी तरह से तैयार कर लिया जाता हे। आरम्भ में खेत की गहरी जुताई कर ली जाती हे। जुताई बाद खेत की मिट्टी में धुप लगने के लिए उसे ऐसे ही खुला छोड़ दिया जाता हे। बाद में उस खेत में गोबर की खाद्य डालकर तीन तिरछी जुताई की जाती हे। बाद में खेत को समतल कर दिया जाता हे बाद में उस समतल भूमि में 5 से 6 फिट दुरी रखते हुए नालीनुमा लम्बी क्यारियों को तैयार कर लिया जाता हे। गोबर की खाद्य के साथ यूरिया, पोटास उचित मात्रा में मिटटी में मिलाकर गड्डो में भर दिया जाता हे। 

6. तरबूज के बीजो की रोपाई

     तरबूज के बीजो की रोपाई बीज के रूप में की जाती हे। भारत के मैदानी भागो में तरबूज को बड़ी मात्रा में उगाया जाता हे। इन बीजो को तैयार किये गए गड्डो में 2 से 3 फिट की दुरी पर 1 cm गहराई में लगाया जाता हे। बीज रोपाई के बाद गड्डो को पारदर्शी पॉलीथिन से ढक दिया जाता हे। तथा पॉलीथिन में कुछ दुरी पर हल्के हल्के छेद कर दिए जाते हे। ताकि पौधे को धुप मिलती रहे।

7. सिंचाई

     मैदानी और शुष्क क्षेत्रों में की गई बीजो की रोपाई में सिंचाई की अधिक जरूरत होती हे। इस दौरान पहली सिंचाई बीज रोपाई के तुरंत बाद करना होता हे। तथा दूसरी सिंचाई 3 से 4 दिन के अंतर्गत की जाती हे। 

8. पौधे पर लगने वाले रोग

     तरबूज के पौधे में कई तरह के रोग दिखने को मिल जाते हे जैसे की कद्दू का लाल कीड़ा, फल की मखहि, बुकनी रोग, डाउनी मिड्लु, फलुजेरियम विल्ट आदि। यह रोग फसल में न आये इसलिए रोजाना फसल की देखभाल करते रहना चाहिए और रोग दिखे तो तुरंत ही इसका इलाज कर देना चाहिए।

9. तरबूज की तुड़ाई

     तरबूज के पौधे बीज रोपाई के 85 से 90 दिन पश्यात तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हे। जब इसके फलो में लगा डठल सूखा दिखाई देने लगे तब इसकी तुड़ाई कर लेनी चाहिए। फल हल्का पीला दिखाई दे तो समझ जाना की फल पूरी तरह से पक गया हे। फल की तुड़ाई बाद इन्हे पैक करके बाजार भेज दिया जाता हे।

अक्शर पूछे जाने वाले सवाल

1. तरबूज कब नहीं खाना चाहिए ?

तरबूज में चीनी की मात्रा बहोत ज्यादा होती हे इसलिए रात में नहीं खाना चाहिए। रात में खाने से यह अच्छी तरह से पच नहीं पाता और ब्लड में शुगर के लेवल को बढ़ा देता हे। रात के दौरान तरबूज का पाचन बहोत धीमा और मुश्किल होता हे। 

2. तरबूज की तासीर कैसी होती हे ?

तरबूज की तासीर ठंडी होती हे। जिसे गर्मी के मौसम में खाना अच्छा होता हे। 

3. विश्व में सबसे अधिक तरबूज का उत्पादन कहा होता हे ?

विश्व में सबसे अधिक तरबूज का उत्पादन चीन में होता हे। 

4. तरबूज सबसे पहले कहा पाया गया था ?

तरबूज सबसे पहले आफ्रिका में पाया गया था। 

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मंगलवार, 21 जून 2022

नींबू के बारे में जानकारी | Lemon Fruit In Hindi

    हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। तो आज हम इस आर्टिकल में बात करने वाले हे नींबू के बारे में जानकारी, अमेजिंग फैक्ट्स, नींबू खाने के फायदे और नुकशान, नींबू की खेती और Faq तो उम्मीद हे की आपको यह हमारा आर्टिकल पसंद आयेंगा। तो चलो देखते हे नींबू के बारे में।

नींबू के बारे में जानकारी

   

नींबू के बारे में जानकारी

 नींबू एक फल हे जो कच्चे हरे और पक्के पिले रंग में देखने को मिल जाते हे। नींबू अधिकांश उष्णदेशीय भागो में पाया जाता हे। इसमें कई तरह की किस्मे दिखने को मिल जाती हे जैसे की फ्लोरिडा रफ, खट्टा नींबू, जंबीरी, कागजी नींबू, कागजी कला आदि हे। इसमें से कागजी नींबू सबसे लोकप्रिय किस्म हे। भारत में यह फल कई जगहों पर देखने को मिल जाता हे जैसे की मद्रास, मुंबई, बंगाल, पंजाब, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, हैदराबाद, दिल्ली, पटियाला, उत्तरप्रदेश, मैसूर तथा गुजरात आदि। 

     नींबू में कई तरह के पोषक तत्व भी पाए जाते हे। जैसे की विटामिन सी, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम, आयरन, फाइबर यह प्रमुख हे। नींबू में सिट्रिक एसिड भी पाया जाता हे। विश्व में नींबू का उपयोग ज्यादातर लोग नींबू पानी के लिए करते हे। नींबू शरीर के लिए बहोत ही लाभदायक फल माना जाता हे।

नींबू के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स

1. नींबू में विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता हे। 

2. नींबू का रस विटामिन सी, विटामिन बी, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नेशियम, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेड से समृद्ध होता हे। 

3. नींबू का वानस्पतिक नाम साइट्रस लिमोन हे और यह रुटेसी कुल का हे। 

4. नींबू का रस एक प्राकृतिक एंटीसेंटिक दवा होने के कारण, त्वचा से सबंधित समस्याओँ का इलाज करता हे। 

5. नींबू में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हे। 

6. क्रिस्टोफर कोलंबस नींबू का बीज अपने साथ 1493 में अमेरिका ले गए थे। 

7. नींबू का पौधा पुरे साल फल देता रहता हे।

8. नींबू एशिया का मूल निवासी हे। 

नींबू खाने के फायदे

1. वजन घटाने के लिए

    नींबू के रस को गुनगुने पानी और शहद के साथ पिने से शरीर का वजन काफी मात्रा में कम हो सकता हे। कई लोग होते हे अपने दिन की शुरुरात नींबू पानी से करते हे। नींबू पानी हमारे शरीर के लिए लाभदायक होता हे। 

2. त्वचा के लिए

    नींबू पानी का सेवन हमारी त्वचा के लिए काफी फायदेमंद साबित होता हे। रोज सुबह नींबू पानी से त्वचा में निखार लाया जा सकता हे। इसके अलावा नींबू पानी के सेवन से चहेरे पर दाग, धब्बो से भी छुटकारा पाया जा सकता हे। 

3. गले में सक्रमण

    नींबू हमारे शरीर के लिए बहोत ही लाभदयफ फल होता हे। नींबू में प्रसिद्ध एंटीबायोटिक गुण होते हे जिसके कारण नींबू गले के सक्रमण से सबंधित समश्याओ का इलाज करता हे। 

4. पाचनक्रिया के लिए

     नींबू पानी में मौजूद नींबू का रस हाइड्रोक्लोरिक एसिड और पित सिक्रेशन के प्रोडक्शन में वृद्धि करता हे जो पाचन के लिए आवश्यक हे। जिन लोगो को पाचन सबंधी समश्याओ जैसे की एब्डॉमिनल कैम्प्स, ब्लोटिंग, जलन और गैस की समस्या से परीशान होते हे इन्हे रोजाना नींबू पानी का सेवन करना चाहिए।

5. किडनी स्टोन समश्या

    जिन लोगो को किडनी स्टोन की शिकायत हे। वो अपनी डाइट में नींबू शामिल कर सकते हे। क्युकी नींबू में मौजूद सिट्रेट गुण पथरी को बनने से रोक सकते हे। भले ही इसका नेचर एसिडिक हो लेकिन शरीर में जाकर यह एल्कलाइन प्रभाव देता हे और किडनी के लिए क्लींजर की तरह काम करता हे। फिर भी बहेतर यही हे की इस बारे में डॉक्टरी सलाह जरूर ली जाये।

नींबू खाने के नुकशान

1. दांत हो सकते हे ख़राब

    नींबू में अधिक मात्रा में एसिड होता हे इसलिए नींबू का सेवन आपके दांतो के इनेमल को ख़राब कर सकता हे। इसलिए आप नींबू पानी या ऐसी किसी भी चीज का सेवन करने के बाद अपने दांतो को ब्रस करके बचाना चाहिए और तुरंत सादा पानी पीना चाहिए।

2. हड्डिया हो सकती हे कमजोर

    अगर आप रोजाना बड़ी मात्रा में नींबू का रस लेते हे तो इसका बुरा असर आपकी हड्डियों पर पड़ सकता हे। नींबू एसिडिक होता हे जिसकी वजह से हड्डिया कमजोर हो सकती हे। ऐसे में कोशिश करे की नींबू पानी का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए।

3. पेट हो सकता हे ख़राब

    कई बार लोग खाना पचाने के लिए नींबू के रस का सेवन करते हे। क्योकि इसका एसिड खाना पचाने में मदद करता हे। मगर पेट में ज्यादा एसिड हो जाने से पेट ख़राब हो सकता हे। इसलिए नींबू के रस का सेवन अधिक मात्रा न करना चहिए। 

4. कुछ सावधानिया

    नींबू पानी सभी लोगो के लिए फायदेमंद ही हे मगर कई लोगो को इसका साइडइफेक्ट होता हे। अगर किसी को नींबू पानी पिने से साइडइफेक्ट देखे तो तुरंत ही इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। अगर आपको विटामिन सी प्राप्त करने के लिए पीना हे तो आधा नींबू निचोड़कर पीना चाहिए ताकि कोई साइडइफेक्ट न हो।

नींबू पानी बनाने का तरीका इस वीडियो में 


नींबू की खेती के बारे में जानकारी

नींबू की खेती के बारे में जानकरी

1. जलवायु

    नींबू की बागबानी के लिए गर्म और नम जलवायु की जरूरत होती हे।उपोष्ण कटिबंधीय और अर्ध शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में नींबू का उत्पादन अधिक मात्रा होता हे। नींबू का उत्पादन भारत में किसी भी जलवायु में की जा सकता हे। इसके लिए 20 से 30 सेंटीग्रेड औसत तापमान उपयुक्त होता हे। 75 से 200 सेंटीमीटर की बारिश वाले क्षेत्रों में नींबू की खेती अच्छी होती हे। 

2. मिट्टी

    नींबू की खेती के लिए बलुई दोमट मिटटी की आवश्यकता होती हे। इसके अतरिक्त लेटराइड और अम्लीय श्यारीय मिट्टी में भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती हे। भारत में कई राज्यों में नींबू की खेती की जाती हे जैसे की हरियाणा, मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि।

3. नींबू की खेती का समय

    नींबू के पौधे लगाने का सही समय जुलाई से अगस्त होता हे। जबकि अच्छी सिंचाई की सुविधा होने पर फरवरी-मार्च में भी इसकी बागबानी की जा सकती हे। जबकि नर्सरी की तैयारी इससे पहले ही कर लेना अच्छा होता हे।

4. नींबू की उन्नत किस्मे

   नींबू की कई किस्मे देखने को मिल जाती हे जैसे की कागजी नींबू, प्रामालिनी, विक्रम किस्म का नींबू, मीठा नींबू आदि इसमें से आपको किस किस्म की बागबानी करनी हे ये तय करना होता हे।

5. खेती की तैयारी

    नींबू की खेती के लिए शरुआत में खेत में मौजूद पुरानी फसलों के अवशेषों हटाकर खेत की गहरी जुताई कर दे। उसके बाद खेत में कल्टीवेटर के माध्यम से दो से तीन अच्छी तिरछी जुताई कर दे। जुताई बाद खेत में पाटा लगाकर उसे समतल बना दे। नींबू के पौधे लागने के लिए खेत में गड्डे तैयार किये जाते हे जिसके बिच 10 फिट की दुरी रख्ही जाती हे। और गड्डा 70 से 80 Cm चौड़ा और 60 Cm गहरा होना चाहिए।

6. पौधा रोपाई

    नींबू की पौधे रोपाई पौधे के रूप में की जाती हे। इसके लिए पौधे नर्सरी से लाने चाहिए। और उसे हमने जो खेत में गड्डे किये थे उसमे लगा लेना। बाद में उसे मिट्टी से भर देना चाहिए। और तुरंत ही सभी पौधे को सिंचाई की आवश्यकता होती हे तो सिंचाई कर दे। 

7. सिंचाई

   अधिक उत्पादन के लिए पौधे को सिंचाई की अधिक जरूरियात होती हे। गर्मियों के मौसम में पौधे को 10 दिन सर्दियों में 20 दिन अंतर्गत पानी देना होता हे। और बारिश के मौसम में जब पौधे को सिंचाई आवश्यता हो तब सिंचाई करनी चाहिए। नींबू की बागबानी के लिए ड्रिप पद्धति से सिंचाई करना सही होता हे।

8. नींबू में लगने वाले रोग

    नींबू में कई तरह के रोग दिखने को मिल जाते हे। अत: सही समय पर रोग प्रबंधक करना भी नींबू की बागबानी के लिए बेहद जरुरी होता हे। इसके लिए रोजाना पौधे की देखभाल करते रहना चाहिए। ताकि कोई रोग पौधे पर दिखे तुरंत ही इसका इलाज हो जाये। और फसल को कोई नुकशान न हो। 

9. फलो की तुड़ाई

    नींबू के पोधो पर फूल आने के तीन से चार माह पच्यात फल आने लगते हे। फलो की तुड़ाई तब की जाती हे जब वो पूर्ण आकार प्राप्त करते हे। जब फलो का रंग पीला और आकर्षक दिखाई दे तब उसकी तुड़ाई की जाती हे। और तुड़ाई बाद इसको धो कर सूखा कर साफ करके लकड़ी के बॉक्स में पैक करके बाजार बेज सकते हे।

अक्शर पूछे जाने वाले सवाल 

1. एक दिन में कितने नींबू खाना चाहिए ?

एक दिन में अधिक से अधिक 2 नींबू का रस ले सकते हे। 

2. नींबू की किस्म में सबसे लोकप्रिय किस्म कौनसी है ?

नींबू की किस्म में सबसे लोकप्रिय किस्म कागजी नींबू है।

3. नींबू में कौनसे कौनसे पोषक तत्व पाए जाते हे ?

नींबू में विटामिन सी, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम, आयरन, फाइबर आदि। और नींबू में सेंट्रिक एसिड भी पाया जाता हे।

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