रविवार, 2 अक्तूबर 2022

सूरजमुखी के उपयोग - Sunflower In Hindi

➤ हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। तो आज में आपको इस आर्टिकल में बात करने वाला हु सूरजमुखी के बारे में जानकारी, अमेजिंग फैक्ट्स, सूरजमुखी फूल के उपयोग, सूरजमुखी फूल की खेती और FAQ तो उम्मीद हे की आपको यह मेरा आर्टिकल पसंद आयेंगा। तो चलो देखते हे सूरजमुखी के बारे मे।


सूरजमुखी फूल के बारे में जानकारी

सूरजमुखी फूल के बारे में जानकारी

➤ सूरजमुखी फूल बेहद खूबसूरत और आकर्षित होता हे जो गोलाकार पिले रंग में पाया जाता हे इसके अलावा यह फूल सफ़ेद और बैगनी रंग में भी मिलते हे। इस फूल को अंग्रेजी में Sunflower कहा जाता हे। इस फूल की करीबन 70 प्रजातियां पायी जाती हे जो रंग और आकार में भिन्न होती हे।

➤ सूरजमुखी फूल की मुख्य विशेषता यह हे की यह फूल सूर्य की दिशा में घूमता रहता हे। यानी की सूरज जिस दिशा में जाता हे यह फूल उस दिशा में घूमता हे। इसलिए यह फूल को सूरजमुखी कहते हे। यह फूल सूरज की रौशनी रहती हे तब तक खिला रहता हे यानी की दिन में यह फूल खिलता हे और रात में मुरझा जाता हे।

➤ यह फूल अमेरिका का देशज हे पर रूस, भारत, ब्रिटेन, डेनमार्क, स्वीडन आदि देशो में पाया जाता हे। सूरजमुखी फूल रूस और यूक्रेन का राष्ट्रीय पुष्प भी हे। यह फूल बाग़ के फूलो में सबसे बड़े फूल माने जाते हे। जो बाग़ की खूबसूरती में चार चाँद लगा देता हे।


सूरजमुखी फूल के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स


➤ सूरजमुखी का फूल सूर्य के साथ साथ उसकी दिशा में धीरे-धीरे घूमता रहता है।

➤ सूरजमुखी अनेक रंगो में पाए जाते हे लेकिन इनमे सबसे अधिक पिले रंग के फूल होते हे।

➤ सूरजमुखी यूक्रेन देश का राष्ट्रीय फूल है।

➤ सूरजमुखी का पौधा 1 से 4 मीटर तक लंबा होता है। लेकिन अच्छी मिट्टी में यह 5 मीटर तक बढ़ता है।

➤ सूरजमुखी कम्पोज़िटि कुल का सदस्य फूल हे।

➤ सूरजमुखी का फूल सूर्योदय पर खिलता हे और सूर्यास्त के बाद बंद हो जाता हे।

➤ सूरजमुखी का फूल बागो में सबसे बड़ा फूल माना जाता हे।

➤ इस फूल में करीबन 70 प्रजातियां पायी जाती हे जो रंग और आकार में भिन्न होती है।

➤ सूरजमुखी के बीजो का ज्यादातर तेल निकालने के लिए उपयोग किया जाता है।


सूरजमुखी के उपयोग


➤ सूरजमुखी के बीज को छीलकर आप कच्चा खा सकते हे।

➤ आप सूरजमुखी बीज को नर्म खाने को कुरकुरा बनाने के लिए भी उपयोग कर सकते हे। 

➤ आप सूरजमुखी के बीज का मख्हन की तरह पेस्ट बनाकर भी उपयोग कर सकते हे।

➤ सूरजमुखी के बीज मूत्रल एव कफनिस्सारक हे अंत: मूत्रकृच्छ, अश्मरी, खांसी, जुकाम आदि में लाभदायक हे।

➤ सूरजमुखी के बीज तेल बनाने के लिए उपयोग किया जाता हे जो तेल बहोत उपयोगी माना जाता हे।


सूरजमुखी फूल की खेती के बारे में जानकारी

सूरजमुखी फूल की खेती के बारे में जानकारी

1. जलवायु

➤ सूरजमुखी के बीजो की रोपाई के समय 15 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती हे। क्योकि अधिक तापमान में इसके बीजो का अच्छे से अंकुरण नहीं हो पाता हे। पौधो के वृद्धि के दौरान सामान्य तापमान तथा फूलो को पकने के लिए शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है।

2. उपयुक्त मिट्टी

➤ सूरजमुखी के कई किस्मो को जैसे की रेतली दोमट से काली मिट्टी में उगाया जा सकता है। यह उपजाऊ और जल निकास वाली मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती हे। यह फसल ह्ल्की क्षारीय मिट्टी को भी सहनेयोग्य हे। अम्लीय और जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती करने से परहेज करे। मिट्टी की ph लगभग 6.5-8 होनी चाहिए।

3. उन्नत किस्में

➤ सूरजमुखी की बाजार में कई उन्नत किस्मे मौजूद हे। जैसे की संकुल प्रजाति, मार्डन, सूर्या, संकर प्रजाति, एस.एच- 3322, के.वी एस.एच 1 आदि किस्मे हे जिसमे से आपको अपनी बागबानी के लिए तय करना होता है।

3. खेत की तैयारी

➤ सूरजमुखी की रोपाई के लिए खेत की अच्छी तरह से गहरी जुताई कर दी जाती हे। जुताई के बाद कुछ समय के लिए खेत को ऐसे ही खुला छोड़ दिया जाता हे। इससे खेत की मिट्टी को अच्छी तरह से धुप लग जाती हे इसके बाद खेत में गोबर की खाद डालकर फिर से जुताई करवा दे इससे खाद अच्छी तरह से मिल जाएंगी। 

➤ सूरजमुखी के खेत में नमी की अधिक आवश्यकता होती हे। इसलिए इसके खेत में पानी लगाकर जुताई करवा दे। इसके बाद खेत में रोटावेटर लगाकर फिर से जुताई करवा दे। जिससे खेत की मिट्टी भुरभुरी हो जाती हे तब जाकर सूरजमुखी की खेती के लिए खेत तैयार होता है।

4. बीज की बुवाई

➤ सूरजमुखी के बीज की बुवाई के लिए समतल खेत में मेड तैयार कर ले और उस पर बीज की बुवाई करनी चाहिए। बीज की बुवाई 4 से 5 सेंटीमीटर गहराई पर करनी चाहिए। लाइन से लाइन की दुरी 45 सेंटी मीटर तथा पौधे से पौधे की दुरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।

➤ ज्यादातर सूरजमुखी के बीज की बुवाई का सर्वोत्तम समय फरवरी का दूसरा पखवारा हे। इस समय बुवाई करने पर मई के अंत पर जून के प्रथम सप्ताह तक फसल पक कर तैयार हो जाती हे। अगर देर से बुवाई की जाती हे तो फसल पकने तक बरसात हो जाती हे और दानो को नुकशान हो जाता हे।

5. सिंचाई

➤ सूरजमुखी के पौधो को अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती हे। इसलिए इसकी पहली सिंचाई बीज रोपाई के तुरंत बाद करनी चाहिए। क्योकि इसके बीजो को अंकुरण के लिए नमि चाहिए। बीज के अंकुरण बाद सूरजमुखी के पौधो को केवल 4 से 5 सिंचाई की आवश्यकता होती हे। बाद में जब पौधे पर फूल में दाने बनने लगे तब खेत में नमि बनाये रखने के लिए जरूरत के हिसाब से पानी लगा दे।

6. रोग और किट

➤ सूरजमुखी के पौधे में कई तरह के रोग दिखने मिलते हे जैसे की पत्त्ति धब्बा व् झुलसा और रतुआ रस्ट आदि रोग दिखने मिलते हे। जो हमारी बागबानी में न आये इसलिए रोजाना पौधो की देखभाल करते रहना चाहिए। 

➤ सूरजमुखी के पौधे में रोग के अलावा किट भी पाए जाते हे जैसे की दीमक, हरे फुदके, ड्सकी और बग आदि किट पाए जाते हे। इनके नियंत्रण के लिए कई प्रकार के रसायनो का भी प्रयोग किया जा सकता है। 

7. फूलो की तुड़ाई

➤ सूरजमुखी के पौधो को पूर्ण रूप से तैयार होने में 90 दिन का समय लग जाता है। इसके बाद इसके फूलो की तुड़ाई कर ली जाती हे। फूलो की तुड़ाई बाद उन्हें एकत्रित कर छायादार जगह पर सूखा लिया जाता हे। सुखाने के बाद मशीन द्वारा इसके फूलो से बीजो को निकाल लिया जाता है।


सूरजमुखी के बारे में अक्शर पूछे जाने वाले सवाल


1. सूरजमुखी किस देश का राष्ट्रिय पुष्प माना जाता है?

सूरजमुखी यूक्रेन का राष्ट्रिय पुष्प माना जाता है।

2. सूरजमुखी का फूल कब खिलता है?

सूरजमुखी का फूल दिन समय खिलता हे और रात को मुरझा जाता हे। 

3. सूरजमुखी किस रंगो में पाया जाता है?

सूरजमुखी के फूल सफ़ेद, बैगनी और पिले रंग में पाए जाते है।


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शुक्रवार, 30 सितंबर 2022

आंवला फल के बारे में जानकारी - Amla In Hindi

➤ हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। तो आज में आपको इस आर्टिकल में बात करने वाला हु आंवला फल के बारे में जानकारी, अमेजिंग फैक्ट्स, आंवला फल खाने के फायदे और नुकशान, आंवला फल की खेती की जानकारी और FAQ तो उम्मीद हे की आपको यह मेरा आर्टिकल पसंद आयेंगा।


आंवला फल के बारे में जानकारी

आंवला फल के बारे में जानकारी

➤ आंवला एक छोटे आकार और हर रंग का फल हे। यह स्वाद में बहोत खट्टा होता हे। आयुर्वेद में इसको अत्यधिक स्वास्थ्यवर्धक माना गया हे। आंवला का पेड़ 6 से 8 मीटर ऊँचा झारीय पौधा होता हे। आंवले के पेड़ की छाल पतली और परत छोड़ती हुई होती हे। आंवले के पत्ते इमली के पत्तो की तरह होते हे जो आधा इंच लंबे होते हे। आंवला गर्मियों और सर्दियों दोनों मौसम में पाया जाता हे। यह एशिया के अलावा यूरोप और आफ्रिका में भी पाया जाता हे। आंवले को मनुष्य के लिए प्रकृति का वरदान कहा जाता हे। आंवला एक ऐसा फल हे जिसमे अम्ल, क्षार, लवण, तिक्त, मधु और कषाय गुण एकसाथ होते हे।

➤ आंवला एक ऐसा फल हे जिसको विटामिन सी का भंडार माना जाता हे। जो हमारे शरीर के लिए बहोत ही उपयुक्त माना जाता हे। आंवले में विटामिन सी के आलावा प्रोटीन, वसा, रेशा, कार्बोहाइड्रेड, खनिज द्रव्य, पानी, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा आदि तत्व पाए जाते हे। जो हमारे लिए बहोत उपयोगी है।


आंवला फल के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स


➤ आंवला एक छोटे आकार और हरे रंग का फल हे जो स्वाद में बहोत खट्टा होता हे।

➤ पुरे विश्व में एक ही ऐसा फल हे जिसे अमृत समान माना जाता हे।

➤ आंवला एशिया के अलावा यूरोप और आफ्रिका में पाया जाता हे।

➤ आयुर्वेद के अनुसार हरीतकी और आंवला दो सर्वात्कृष्ट औषधीया हे।

➤ आंवला का प्रयोग कई तरह से किया जाता हे जैसे की आंवला ज्यूस, आंवला पाउडर, आंवला अचार आदि बनता हे।

➤ आंवला के पौधे और फल कोमल प्रकृति के होते हे इसलिए इसमें कीड़े जल्दी लग जाते हे।

➤ आंवला में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हे जो हमारे शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद होते हे।

➤ आंवला श्वास, रोग, दमा, क्षय, हदय रोग, छाती के रोग, मूत्र विकार, कब्ज आदि रोगो से लड़ने की क्षमता रखता हे।


आंवला फल खाने के फायदे


1. पाचन तंत्र के लिए

➤ आंवला में प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता हे। जो शरीर के पाचन तंत्र को ठीक कर पेट की समश्याओ से छुटकारा दिलाता हे। आंवला का खाली पेट में रोज सेवन करने से पाचन क्रिया में सुधार होता हे।

2. त्वचा के लिए

➤ आंवला खाने से खूबसूरती भी बढ़ती हे। सौंदर्य बनाये रखने के लिए आंवला रामबाण हे। क्योकि इसके सेवन से त्वचा में निखार आता हे। और दमकती रखती हे। इसमें मौजूद एंटी-फंगल व् बैक्टेरियल इंफेक्शन को दूर करते हे।

3. हड्डियों के लिए

➤ आंवला में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता हे जिसके सेवन से हड्डिया मजबूत होती हे। और जोड़ो से दर्द से भी राहत मिलती हे। 

4. बालो के लिए

➤ आंवला बालो के लिए बहोत उपयोगी माना जाता हे। यह बाल झड़ने और सफ़ेद होने से रोकता हे। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स आयरन और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में मिलता हे। जो बालो को झड़ने से रोकता हे।

5. डायाबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के लिए

➤ आंवला क्रोमियम का सबसे अच्छा त्रोत हे। आंवला से शरीर में ब्लड शुगर के लेवल को कम करता हे। और डायाबिटीज को भी नियत्रित करने में मदद करता हे। इसके अलावा यह हाई ब्लड प्रेशर को भी कम करने में मदद करता हे।


आंवला फल खाने के नुकशान


1. एसिडिटी

➤ जिन लोगो को एसिडिटी की शिकायत रहती हे उन्हें आंवले का सेवन करने से बचना चाहिए। आंवले में मौजूद विटामिन सी की अधिकता हाइपर एसिडिटी वाले लोगो की दिक्कते बढ़ा सकती है।

2. कब्ज के लिए

➤ आंवला में भरपूर मात्रा में फाइबर होता हे लेकिन इसके अधिक सेवन से आपको कब्ज की भी समस्या हो सकती हे। ज्यादा आंवला खाने की वजह से मल कठोर हो जाता हे। अगर आप हर दिन आंवले का सेवन करते हे तो आपको पानी का सेवन भी ज्यादा करना चाहिए जिससे की आपको कब्ज जैसी परिशानी का सामना न करना पड़े।

3. यूरिन में जलन

➤ आंवले में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता हे। इसके ज्यादा सेवन से आपके मूत्र में जलन हो सकती हे। कई लोगो को अपने मूत्र में दुर्गन्ध का अनुभव भी कर सकते हे।

4. सर्जरी कराने वालो के लिए

➤ जिन लोगो को भविष्य में सर्जरी करवानी हो उन्हें फिलहाल आंवले से बचना चाहिए। इस फल का अधिक सेवन करने से रक्तस्त्राव का खतरा होता हे। सलाह दी जाती हे की सर्जरी के कम से कम 2 सप्ताह पहले आंवला खाना बंध कर देना चाहिए।

5. ब्लड प्रेशर को करता हे प्रभावित

➤ हाइपरटेंशन और किडनी की समस्या से परीशान लोगो को आंवले का सेवन करने से बचना चाहिए। इसका सेवन करने से शरीर में सोडियम का स्तर बढ़ जाता हे, जिससे किडनी अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाती। जिसकी वजह से शरीर में पानी भरना शुरू हो जाता हे और हाइब्लडप्रेशर की समस्या पैदा होने लगती हे।


आंवला फल की खेती के बारे में जानकारी

आंवला फल की खेती के बारे में जानकारी

1. उपयुक्त जलवायु

➤ आमतौर पर आवला की बागबानी उन इलाको में होती हे जहा गर्मी और सर्दी का तापमान में अधिक अंतर् नहीं होता हे शुरुआत में इसके पौधे को सामान्य तापमान की जरूरत होती हे मगर बड़ा होने के बाद वो 0 से 45 डिग्री तक का तापमान सह सकता हे। आंवले के पौधे को विकास के लिए गर्मी की जरूरत जरूरत होती हे। लम्बे समय तक ठण्ड पड़ने से इसमें नुकशान होने का भय रहता हे।

2. उपयुक्त मिट्टी

➤ इसके सख्त होने की वजह से इसे मिट्टी की हर किस्म में उगाया जा सकता हे। इसे हल्की तेजाबी, नमकीन और छूनेवाली मिट्टी में उगाया जा सकता हे। अगर इसकी खेती बढ़िया जल निकास वाली और उपजाऊ-दोमट मिट्टी में की जाती हे। तो यह अच्छी पैदावार देती हे। यह खारी मिट्टी को भी सहयोग्य हे। इसकी खेती के लिए मिट्टी की ph6.5-9.5 होना चाहिए।

3. उन्नत किस्मे

➤ वर्तमान में स्थानीय बाजारों में विभिन्न प्रकार की आंवला की व्यापारिक किस्मे मौजूद हे। जिन्हे खासकर जल्दी पैदावार लेने के लिए विकसित किया गया हे। यह किस्मो को पुरे भारत में उगाया जाता हे। आंवले की उन्नत किस्मे जैसे की फ्रांसिस, नरेंद्र-10, कृष्णा, चकइया, बनारसी, एन ए-4 आदि किस्मे हे जिसमे आपको अपनी बागबानी के लिए तय करना होता है।

4. खेत की तैयारी

➤ खेत को तैयार करने के लिए खेत को सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से गहरी जुताई कर दी जाती हे। ताकि पुराने फसल के अवशेष नष्ट हो जाये। जुताई के बाद खेत को कुछ दिनों के लिए खुला छोड़ दे ताकि खेत को अच्छी तरह से धुप लग जाये।

➤ इसके बाद खेत को फिर से अच्छी तरह से जुतवा दे बाद में मिट्टी भुरभुरी हो जाने पर पाटा लगाकर खेत को समतल कर दे। इसके बाद खेत में 4 मीटर की दुरी रखते हुए दो फिट चौड़े और डेढ़ फिट गहरे गड्डे तैयार कर ले। इसके बाद जैविक और रासायनिक उवर्रको को मिट्टी में मिलाकर गड्डो में भर दे। यह गड्डे पौधा रोपाई के 1 महीने पहले तैयार कर ले।

5. पौधा रोपाई

➤ आंवले के पौधे खेत में लगाने के एक महीने पहले नर्सरी में तैयार कर लिए जाते हे। इसके बाद पौधे को तैयार किये गड्डो के बिच एक छोटा सा गड्डा तैयार कर के लगा देना चाहिए। इसके बाद पौधो को मिट्टी से अच्छी तरह दबा दे। आंवले के पौधे सितंबर माह में लगाना उपयुक्त माना जाता हे। इस समय लगाए गए पौधे अच्छे से वृद्धि करते हे।

6. पौधो की सिंचाई

➤ आंवले के पौधो को शरुआत में सिंचाई की ज्यादा जरूरत होती हे। इसके पौधे खेत में लगाने के बाद तुरंत ही पहली सिंचाई कर देनी चाहिए। इसके पौधो को गर्मी के मौसम में सप्ताह में एक बार और सर्दियों के मौसम में 15 से 20 दिन के अंतराल में सिंचाई कर देनी चाहिए। बाद में जब पौधा बड़ा हो जाता हे तो तब इसे सिंचाई की ज्यादा जरूरत नहीं होती। तब आंवले के पेड़ को महीने में एक बार सिंचाई करनी चाहिए। लेकिन पेड़ पर फूल खिलने के पहले सिंचाई बंद कर देनी चाहिए क्योकि इस समय सिंचाई करने से फूल गिरने लगते हे। और फल कम आते हे। 

7. पौधो पर लगने वाले रोग

➤ आंवले के पौधो में फल आने के बाद ही कई तरह के रोग दिखने मिलते हे। जिसका समय पर नियत्रण कर देना चाहिए नहिंतर फसल बर्बाद हो जाती हे। पौधो पर दिखने वाले रोग जैसे की काला धब्बा रोग, कुंगी रोग, फल फंफूदी, छालभक्षी किट रोग आदि तरह के रोग दिखने मिलते हे।

8. फलो की तुड़ाई

➤ दिसंबर के अंत तक आंवले की फसल पककर तैयार हो जाती हे। और लगभग आंवला पकने के बाद इसका रंग पीला-हरा या हरा-पीला हो जाता हे, इस अवस्था में पूर्ण रूप से पक जाती हे। अब जनवरी के महीने में आंवले की तुड़ाई शुरू कर देनी चाहिए। फलो की तुड़ाई बाद उसे अच्छे से पैक करके बाजार भेज दिया जाता हे।


आंवला फल के बारे अक्शर पूछे जाने वाले सवाल


1. भारत में आंवले का सबसे ज्यादा उत्पादन कहा होता है?

➤ भारत में आंवले का सबसे ज्यादा उत्पादन उत्तरप्रदेश में होता है।

2. आंवला का पेड़ कब लगाना चाहिए?

➤ आंवले के पौधे की रोपाई का समय फरवरी से मार्च का महीना अच्छा रहता हे। जिसमे पौधे अच्छी तरह से विकास करते हे।

3. आंवले फल का वैज्ञानिक नाम क्या है?

➤ आंवले फल का वैज्ञानिक नाम फाईथैलस एम्बिका (Phyllasthus Emblica) हे।


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बुधवार, 28 सितंबर 2022

Sweet Lemon In Hindi - मौसंबी फल की खेती के बारे में जानकारी

हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। तो आज में आपको इस आर्टिकल में बात करने वाला हु मौसंबी फल के बारे में जानकारी, अमेजिंग फैक्ट्स, मौसंबी खाने के फायदे और नुकशान, मौसंबी की खेती और FAQ तो उम्मीद हे की आपको यह मेरा आर्टिकल पसंद आयेंगा। तो चलो देखते हे मौसंबी के बारे में।


Sweet Lemon In Hindi - मौसंबी

मौसंबी फल की जानकारी

मौसंबी फल के बारे में जानकारी


मौसंबी नींबू परिवार का एक बहोत ही पौष्टिक और रसदार फल है। जिसे मीठा नींबू भी कहा जाता हे। मौसंबी का फल नारंगी के बराबर आकार का होता हे। मौसंबी फल कच्ची अवस्थामे हरे रंग का तथा पकने पर हल्का हरा या सुनहरे रंग का हो जाता हे। फल के अंदर चिकने सफ़ेद रंग के, तथा नुकीले बीज होते हे। मौसंबी का वानस्पतिक नाम सिट्रस साईंनेन्सीस हे।

मौसंबी कई पौष्टिक तत्वों से भरपूर होती हे इसमें कई तरह के विटामिन्स होते हे इसके अलावा इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, आयरन, पोटैशियम, फॉस्फोरस आदि तत्व इसमें भरपूर मात्रा में पाए जाते हे। इसमें सबसे अधिक मात्रा में विटामिन सी और फाइबर पाया जाता है।


मौसंबी फल के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स


1. मौसंबी एक खट्टा मीठा फल हे जो पोषण और गुणों से भरपूर होता हे।

2. मौसंबी को मीठा नींबू भी कहा जाता हे।

3. गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मौसंबी का ज्यूस बहोत फायदेमंद होता है।

4. प्रतिदिन मौसंबी का ज्यूस पिने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।

5. आयुर्वेद में मौसंबी फल के छिलके और मौसंबी के ज्यूस का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है।

6. मौसंबी एक ऐसा फल हे जिसमे कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हे जो हमारे शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद होते है।

7. मौसंबी का वानस्पतिक नाम सिट्रस साईंनेन्सीस हे।

8. मौसंबी नींबू परिवार का फल माना जाता है।


मौसंबी फल खाने के फायदे


1. कब्ज की समस्या से राहत

पेट से सबंधित रोगो से बचने के लिए हर दिन एक मौसंबी खाना चाहिए। इसमें फाइबर अधिक होता हे जो कब्ज में फायदेमंद हे कब्ज होने पर मौसंबी का ज्यूस नमक डालकर पिए। इससे शरीर में मौजूद विषाक्त पर्दार्थ निकल जाते हे।

2. वजन घटाने के लिए

अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हे तो अपनी डाइट में मौसंबी शामिल कर सकते हे। मौसंबी के ज्यूस में पानी और शहद मिलाकर सुबह सेवन कर सकते हे। ये वजन कम करने के लिए काफी मदद कर सकता हे।

3. हड्डियों के लिए

घुटनो के दर्द, ऑस्ट्रियोपोरोसिस और जोड़ो से सबंधित सभी समश्याओ में यह फायदेमंद हे, क्योकि इसमें मौजूद विटामिन सी तंतुओ के स्यरण को रोकता हे। जिससे इस तरह की समस्याये नहीं आती।

4. पाचन के लिए

मौसंबी में फ्लेवोनोइड्स होते हे जो पाचन में सुधार करने में मदद करते हे। मौसंबी का ज्यूस पिने से पाचन सबंधी किसी भी समस्या जैसे अपच और गेस्ट्रिक समश्याओ को दूर रखने में मदद मिलती हे। पाचन सबंधित समश्याओ का इलाज करने के लिए अपने ज्यूस में एक चुटकी नमक मिला सकते हे।

5. इम्युनिटी करे बूस्ट

मौसंबी में एंटी कार्सिनोजेनिक होता हे जो इम्यून सिस्टम को बहेतर करता हे। साथ ही दिल में ब्लड सर्कुलेशन को बहेतर बनाता हे। जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार होता हे।


मौसंबी फल खाने के नुकशान


1. किडनी को नुकशान

मौसंबी में प्रचुर मात्रा में पोटैशियम पाया जाता हे। ऐसे में इसके ज्यूस का सेवन किडनी से सबंधित किसी समस्या से ग्रस्त व्यक्ति के लिए हानिकारक हो सकता हे। क्योकि इस पोटैशियम तत्व को किडनी पेशंट कंट्रोल नहीं कर पाता हे।

2. गर्भवती महिलाओ के लिए

जब महिला गर्भवती होती हे तो उनकी प्रतिरोधक श्रमता कमजोर हो जाती हे और इसकी वजह से पेट सबंधी समश्याए बढ़ने लगती हे अगर आप अधिक मात्रा में मीठी मौसंबी का ज्यूस लेते हे तो यह गर्भवती महिलाओ के लिए हानिकारक हो सकता हे। इससे पेट दर्द, पेट में मरोड़ और डायरिया की भी समस्या हो सकती हे।

3. एलर्जी

अगर किसी को सिट्रस एसिड से एलर्जी हे, तो मौसंबी का सेवन नुकशानदायक हो सकता हे। ऐसे में मौसंबी के सेवन से एलर्जी हो सकती हे।

4. एसिडिटी

मौसंबी में साइट्रिक एसिड पाया जाता हे और विटामिन सी युक्त मौसंबी के ज्यूस का अधिक सेवन एसिडिटी की समस्या पैदा कर सकता हे।

5. पेट दर्द और उल्टी की समस्या

मीठी मौसंबी सर दर्द और चक्क्रर में मदद करती हे मगर उसका अधिक सेवन करने से आपको उल्टी और पेट दर्द की समस्या हो सकती हे यह इसलिए होता हे क्युकी इसमें विटामिन सी होता हे और अधिक विटामिन सी उल्टी का कारण बनता है।


मौसंबी फल की खेती के बारे में जानकारी

मौसंबी फल की खेती के बारे में जानकारी

1. उपयुक्त जलवायु

मौसंबी की खेती के लिए संप्रमाण सर्दी और गर्मी अनुकूल हे। जहाँपर जलवायु सूखा हो या बारिश ज्यादा नहीं होती हो ऐसे क्षेत्रों में मौसंबी की फसल अच्छी तरह से होती हे। ज्यादा नमी वाले जलवायु में या जहा ज्यादा बारिश होती हो ऐसे क्षेत्रों में इसकी खेती अच्छी नहीं होती।

2. उपयुक्त मिट्टी

मौसंबी की खेती के लिए दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती हे तथा उचित जल निकास वाली उपजाऊ भूमि को भी इसकी खेती के लिए आदर्श माना गया हे। इसकी खेती में भूमि को 1.5 से 2 मीटर गहराई वाली होनी चाहिए। इसके अलावा P.H मान 5.5 से 7.5 हो।

3. उन्नत किस्मे

बाजार में मौसंबी की कई उन्नत किस्मे मौजूद हे जैसे की केलेंशिया, वाशिंगटन नेव्हेल, काटोलगोल्ड, सतगुड़ी और न्यूसेलर आदि किस्मे हे जो बहोत उन्नत किस्मे मानी जाती हे। जिसमे से आपको अपनी बागबानी के लिए तय करना होता हे।

4. खेत की तैयारी

मौसंबी की खेती के लिए सबसे पहले खेती की अच्छी तरह से जुताई कर दे और बाद में खेत को समतल कर दे बाद में उस खेत में 6x6 मीटर की दुरी रखते हुए 1.5 फिट की गहराई वाले गड्डे तैयार कर दे। बाद में उस खेत को 10 से 15 दिन के लिए ऐसे ही खुला छोड़ दे ताकि उसमे हानिकारक कीड़े मर जाये। बाद में उस गड्डो में 25 किलो गोबर की खाद 1 किलो सुपर फास्फेट और 100 ग्राम दीमक के मिश्रण से गड्डे भर देने चाहिए।

5. पौधे की रोपाई

मौसंबी का पौधा आप साल भर में किसी भी समय रोप सकते हे। तो आगे हमने जो खेत में गड्डे खाद से भरे थे उसमे फिरसे गड्डे किये जाते हे और नर्सरी से लाया गया पौधा उसमे रोपाई कर ली जाती हे। और बाद में पौधे को चारोओर से मिट्टी से दबा दिया जाता हे।

6. सिंचाई

पौधे रोपाई के तुरंत ही बाद सिंचाई कर देनी चाहिए और पौधो को स्थिर होने में 2 महीने का समय लगता हे। गीष्म ऋतु के मौसम में पौधो को 5 से 10 दिन के अंतर्गत पानी देना होता हे। तथा सर्दियों के मौसम में 10 से 15 दिन के अंतर्गत पानी देना चाहिए और बारिश के मौसम में जब पौधे को जरूरत हो तब पानी देना चाहिए। मौसंबी की खेती में ड्रिप सिंचाई उपयुक्त मानी जाती है।

7. रोग

मौसंबी का पौधा एक ऐसा हे जिसमे कम रोग दिखने मिलते हे मगर पौधे में रोग न आये इसलिए पौधे की रोजाना देखभाल करते रहना चाहिए। और जैसे ही पौधे में कोई रोग दिखे तुरंत ही इसका इलाज करिये।

8. फलो की तुड़ाई

मौसम्बी के पेड़ रोपाई के 3 वर्ष बाद पैदावार देना आरम्भ कर देते हे। मौसम्बी के 4 वर्ष के एक पौधे से 20 से 50 KG फल मिल जाते हे। मौसंबी के पौधे पर फल पूर्ण आकार के दिखने लगे तब उस फल की तुड़ाई कर ली जाती है। और फलो को अच्छी तरह से पैक करके बाजार भेज दिया जाता है।


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सोमवार, 26 सितंबर 2022

आलूबुखारा फल के बारे में जानकारी - Aloo Bukhara In Hindi

➤ हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। तो आज हम इस आर्टिकल में बात करने वाले है आलूबुखारा फल की जानकारी, अमेजिंग फैक्ट्स, आलूबुखारा खाने के फायदे और नुकसान, तो उम्मीद है की आपको यह हमारा आर्टिकल पसंद आयेंगा। तो चलो देखते है आलूबुखारा के बारे में।


आलूबुख़ार फल के बारे में जानकारी

आलूबुखारा फल के बारे में जानकारी


➤ यह फल मुख्यत: गर्मियों के सीजन में ही मिलता है। ये फल दिखने में बिलकुल टमाटर की तरह दिखता है। आलूबुखारा फल स्वाद में खट्टा मीठा होता है। यह फल में रस भरा होता है। इसका छिलका मुलायम होता है। आलूबुखारा फल के बीच में एक गुठली होती है। यह फल लाल रंग का होता है पर कुछ इसकी प्रजाति का रंग पीला होता होता है। पूरी दुनिया में आलूबुखारा फल की 2000 से ज्यादा किस्में मौजूद है। यह फल मुख्यत: अफगानिस्तान में पाया जाता है और यह भारत में भी उगाया जाता है। आलूबुखारा फल को सीधे भी खा सकते है और इसका जूस बनाकर भी सेवन किया जाता है।

➤ आलूबुखारा फल में पाए जाने वाले पोषक तत्व जैसे की इसमें कैल्शियम, आयरन, कॉपर, मैग्नीशियम, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन ई, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट आदि पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। आलूबुखारा फल खाने से शरीर की गर्मी शांत होती है और सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। आलूबुखारा फल खाने से वजन कम होता है। ये शरीर के रक्त संचार को ठीक करता है। आलूबुखारा गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही गुणकारी होता है। ये कैंसर उतपन्र करने वाले सालों को नष्ट करता है। यह हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को ठीक करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। आलूबुखारा फल पोषक तत्वों से भरपूर होता है।


आलूबुखारा फल के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स


➤ पूरी दुनिया में आलूबुखारा फल की 2000 से ज्यादा किस्में मौजूद है।

➤ आलूबुखारा मुख्यत: अफगानिस्तान में पाया जाता है और यह भारत में भी उगाया जाता है।

➤ यह फल मुख्यत: गर्मियों के सीजन में ही मिलता है।  

➤ आलूबुखारा फल दिखने में बिलकुल टमाटर की तरह दिखता है।

➤ यह फल स्वाद में खट्टा मीठा होता है।

➤ इसका छिलका मुलायम होता है।

➤ आलूबुखारा का फल लाल रंग का होता है, पर इसकी कुछ प्रजाति का रंग पीला होता है। 


आलूबुखारा फल खाने के फायदे


1. हड्डियों के लिए

 आलूबुखारा फल का सेवन हड्डियों के लिए भी फायदेमंद है, यह हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। 

2. कैंसर के लिए

➤ आलूबुखारा फल में कई ऐसे तत्व पाए जाते है, जो कैंसर जैसी भयानक बीमारी के खतरे को भी कम करने में सहायक होते है। 

3. पाचन के लिए

➤ आलूबुखारा फल का सेवन से पाचन तंत्र बेहतर बनाने के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है, इसमें आइसटिन और सोर्बिटोल मौजूद होते है, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते है, साथ ही इस फल का सेवन करने से पाचन से जुडी समस्या दूर होती है।  

4. ग्लोइंग स्किन के लिए

➤ आलूबुखारा फल में विटामिन सी का एक अच्छा सौर्स है, जो त्वचा को हेल्दी रखने और त्वचा का ग्लो बढ़ाने में सहायक होता है। 

5. इम्युनिटी के लिए

➤ आलूबुखारा फल विटामिन सी और विटामिन ए का एक अच्छा स्रोत है, जो शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार होते है। 

6. आंखो के लिए

➤ आलूबुखारा फल में विटामिन के और विटामिन बी6 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, विटामिन्स हमारी आंखो और त्वचा के लिए अच्छा माना जाता है, इस फल को डाइट में शामिल कर आंखो की रोशनी को बढ़ाया जा सकता है।  

7. कब्ज के लिए

 आलूबुखारा फल कब्ज की समस्या में मददरूप होता है। आलूबुखारा फल में विधमान फाइबर कब्ज की समस्या दूर करता है। आलूबुखारा फल हमारे पाचन तंत्र को शक्ति देता है। इस फल को नियमित खाने से कब्ज में लाभ होता है।

8. खून की कमी के लिए

➤ रक्त वृद्धि करने के लिए आलूबुख़ारा फल बहुत ही फायदेमंद होता है। इस फल में पाए जाने वाला आयरन शरीर में रक्त की कमी को दूर करता है। इस फल  को नियमित खाने से शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ती है।

9. मोटापा घटाने के लिए

➤ मोटापा घटाने में आलूबुखारा फल मददरूप होता है। इसे खाने से शरीर का बढ़ा हुआ वजन कम होता है। शरीर में बढ़ी हुई चर्बी को भी नष्ट करता है। इसका नियमित रूप से सेवन करने से फायदा होता है।

10. मानसिक विकार के लिए

➤ आलुबुखारा फल में पाए जाने वाले पोषक तत्व हमारी मानसिक सेहत को ठीक रखता है। यह फल हमे तनाव से मुक्ति दिलाता है। ये फल मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार के विकारों में भी लाभकारी होता है।

11. यकृत रोग के लिए

➤ यकृत की कमजोरी दूर करने के लिए ये फल बहुत ही फायदेमंद होता है। इस फल को खाने से यकृत की सूजन दूर होती है, ये यकृत के इंफेक्शन को भी दूर करता है और हेपेटाइटिस रोग को भी दूर करता है।


आलूबुखारा फल खाने के नुकशान


➤ अगर आपको पथरी की समस्या है तो ऐसे में आलूबुखारा फल नहीं खाना चाहिए।

➤ आलूबुखारा फल अधिक मात्रा में खाने से पेट से जुडी समस्याएं हो सकती है।

➤ अगर आप वजन को संतुलित रखना चाहते है, तो आलूबुखारा ज्यादा न खाएं।

➤ आलूबुखारा फल ज्यादा मात्रा में सेवन करने से गैस की शिकायत हो सकती है।

➤ इस फल का अत्यधिक सेवन से दस्त यानि डायरिया की शिकायत हो सकती है।


आलूबुख़ार फल के बारे में अक्शर पूछे जाने वाले सवाल


1. आलूबुखारा की तासीर गर्म होती है क्या?

➤ आलूबुखारा तासीर ठंडी होती है,

2. खाली पेट आलूबुखारा खाने से क्या होता है?

➤ आलूबुखारा फल का नियमित सेवन से पाचन क्रिया ठीक रहती है, इसमें अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जिससे पेट की पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है, इसमें सोर्बिटोल और आइसटिन होती है, जिससे पाचन क्रिया अच्छी तरह काम करता है और हमारा स्वस्थ्य अच्छा रहता है।

3. आलूबुखारा फल कब खाना चाहिए?

➤ आलूबुखारा फल को आप सुबह और शाम के समय स्नैक के तौर पर खा सकते है।

4. आलूबुखारा कितने रुपए किलो है?

➤ आलूबुखारा फल बाजार में इन किस्मों का दाम 50 से 60 रुपए किलो मिल जाता है।


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शनिवार, 24 सितंबर 2022

नवरात्री शायरी 2022 - Best Navratri Shayari In Hindi


Navratri shayari In Hindi
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खुशियों का नजराना, बेशुमार हो

प्यार का तराना, उपहार हो

ना रहे कोई गम का अहसास

ऐसा ही नवरात्री उत्सव इस साल हो।

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नव फूल खिले, नव दिप जले

रोज नई बहार मिले

नवरात्री के इस अवसर पर आपको 

माँ का आशीर्वाद मिले।

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चाँद की चांदनी, बसंत की बहार

फूलो की खुशबु अपनों का प्यार 

मुबारक हो आपको नवरात्री का त्यौहार।

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उपहार हो खुशियों का

आपकी कामयाबी बेशुमार हो

दुःख का कोई अहसास न हो 

ऐसा नवरात्रि का त्यौहार हो।

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Navratri Shayari Image

नवरात्री शायरी 2022 

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माँ दुर्गा करती हे अपना श्रृंगार 

लाल चुनरी ओढ़ कर

खुशियों से झोली भरे आपकी 

मुबारक हो आपको नवरात्री का त्यौहार।

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ख़ुशी हर पल कदम चूमे

नवरात्री में हम सब मिलकर झूमे

हो न कभी आपका दुःख से सामना

यही हे आपको नवरात्री की शुभकामना।

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फूल खिले पग-पग में, ख़ुशी आपको इतनी मिले

दुखो से कभी न हो आपका सामना

यही हे नवरात्रि की शुभकामना।

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माता का दरबार सजा हे

भक्तो की हे लगी कतार

नवरात्री के इस पावन पर्व पर

आपको खुशिया मिले अपार।

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Navratri Shayari 2022

नवरात्री पर शायरी

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माँ की ज्योति से प्रेम मिलता हे

सबके दिलो को मरहम मिलता हे 

जो भी जाता हे माँ के द्वार

कुछ न कुछ जरूर मिलता है।

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माँ का दरबार लाल रंग से सजा

हर्षित हुआ मन

पुलकित हुआ संसार अपने पावन कदमों से 

माँ आये आपके द्वार 

मुबारक हो आपको ये नवरात्री का त्यौहार।

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हर कदम पे फूल गिरे जीवन के 

इस नवरात्री आपको हर खुशिया मिले।

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न देना हमें कोई वरदान, बस थोड़ा सा प्यार देना

तेरे चरणों में बीते ये जीवन सारा

एक बस यही आशीर्वाद देना।

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नवरात्रि पर शायरी

Best Navratri Shayari In Hindi

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सजा हे दरबार, एक ज्योति जगमगाई हे

सुना हे नवरात्रि का त्यौहार आया हे

वो देखो मंदिर में मेरी माता मुस्कुराई है।

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माता के नौ रूपों में हे छिपा सुष्ट्री का सार 

जग में हे नवदुर्गा की महिमा अपरम्पार

ज्ञान बढ़ाये, विवेक बढ़ाये, बाटे सबको प्यार

तीन लोक में होती हे माता की जयकार।

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देवी के कदम आपके घर में आये

आप खुशियों से नहाये, परिशानी

आपसे आँखे चुराए

नवरात्री की आपको बहोत सारी शुभकामनाए।

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जो माँ के दर्शन पाए वो 

सोये भाग्य जगाये 

जो अपने मन को भक्ति में लगाए

वह जीवन के सारे सुख पाए।

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जिंदगी की हर तमन्ना हो पूरी

आपकी कोई आरजू रहे ना अधूरी

करते हे हाथ जोड़कर माँ दुर्गा से विनती

आपकी हर मनोकामना हो पूरी।

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Best Navratri Shayari In Hindi

Navratri Shayari Image

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जिसने सिर झुकाया हे माँ के चरणों में 

वही तो आसमान की बुलंदियों 

को छू पाया हे।

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माँ पास की भी सुनती हे और 

दूर की भी सुनती हे 

माँ तो आखिर माँ हे 

माँ तो हर मजबूर की सुनती हे।

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माँ की आराधना का ये पर्व हे

माँ की 9 रूपों की भक्ति का ये पर्व हे

बिगड़े काम बनाने का ये पर्व हे

भक्ति का दिया दिल में जलाने का यह पर्व हे।

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कीवी फल के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स - Kiwi Fruit In Hindi

➤ हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार। तो आज में आपको इस आर्टिकल में बात करने वाला हु। कीवी फल के बारे में जानकारी, अमेजिंग फैक्ट्स, कीवी फल खाने के फायदे और नुकशान, कीवी फल की खेती और FAQ तो उम्मीद हे की आपको यह आर्टिकल पसंद आयेंगा। तो चलो देखते हे कीवी फल के बारे में।


कीवी फल के बारे में जानकारी

Kiwi Fruit In Hindi


➤ हलके भूरे रंग का चीकू सा दिखने वाला रोयेदार कीवी एक पहाड़ी फल है। कीवी एक विशेष प्रकार का स्वादिष्ट फल होता है। कीवी अपने सुंदर रंग के लिए लोगो में अधिक पसंद किया जा रहा है। कीवी फल बहार से भूरा और अंदर से मुलायम व् हरे रंग का होता है। इसके अंदर काले रंग के छोटे-छोटे बीज होते हे। जिन्हे खाया जा सकता हे। इसका स्वाद बहोत मीठा होता हे। यह फल बाजार में आसानी से मिल जाएगा। इस फल का वैज्ञानिक नाम एक्टीनिडिया डेलीसिओसा हे। यह फल सबसे पहले चीन में उगाया जाता था। जहा से यह न्यूजीलैंड पंहुचा और आज विश्व भर में इसकी कई किस्मे है। 

➤ ये एक ऐसा फल हे जो पुरे साल उपलब्ध रहता है। आप किसी भी सीजन में कीवी खा सकते है। कीवी पोषक तत्वों से भरपूर होता हे जैसे की विटामिन सी, पोटेशियम, फोलिक एसिड, फाइबर, विटामिन ई, पॉलीफैनोस, कैरोटिनॉयड आदि पोषक तत्व पाए जाते है। जो हमारे शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद होते है।


कीवी फल के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स


➤ कीवी फल को चाइनीज गूजबेरी के नाम से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम एन्टीनिडिया डेलीसिओसा हे।

➤ कीवी में मॅल्युटिन पाया जाता हे जो हमारी त्वचा और टिस्यू को स्वस्थ रखता है।

➤ कीवी चीन का राष्ट्रिय फल माना जाता है।

➤ क्या आपको पता हे रोजाना कीवी का सेवन करने से हार्टअटैक का खतरा बहोत ही कम हो जाता है।

➤ कीवी में पोटैशियम की मात्रा अधिक होती हे जिससे ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है।

➤ कीवी फल रोग प्रतिरोधक श्रमता के लिए लाभकारी होता है।

➤ कीवी में फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है जिसका अधिक सेवन करने से पेट दर्द और पेट फूलना जैसी समस्या हो सकती हे।


कीवी फल खाने के फायदे


1. डायाबिटीज के लिए

➤ डायाबिटीज के मरीजों के लिए कीवी का सेवन बहोत फायदेमंद होता है। कीवी में मौजूद गुण डायाबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में फायदेमंद माने जाते हे। डायाबिटीज के मरीज डॉक्टर की सलाह लेकर रोजाना कीवी का सेवन कर सकते हे।

2. आँखों के लिए

➤ कीवी फल के सेवन से आँखों की रौशनी बढ़ने में भी मदद मिलती हे। आँखों की सेहत के लिए कीवी बहोत गुणकारी माना जाता है।

3. त्वचा के लिए

➤ कीवी का सेवन सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि त्वचा के लिए भी लाभकारी हे। दरअसल इसमें विटामिन सी हे जो जरुरी एंटीऑक्सीडेंट हे। यह त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों और प्रदुषण के कारण होने वाले नुकशान से बचा सकता हे। त्वचा की बनावट में सुधार कर सकता हे। साथ ही त्वचा को रिंकल फ्री, जवां और खूबसूरत बना सकता हे।

4. पाचन और कब्ज के लिए

➤ कीवी खाने से पाचन तंत्र से जुडी समस्याओ में बहोत फायदा मिलता हे। कीवी में फाइबर भरपूर मात्रा में होता हे फाइबर पाचन तंत्र को हेल्दी रखने के लिए बहोत फायदेमंद माना जाता हे और जो कब्ज की समस्या से जुज रहे हे उनके लिए भी कीवी खाना बहोत फायदेमंद है।

5. सही वजन के लिए

➤ वजन संतुलन के लिए भी कीवी खाना फायदेमंद है। स्वस्थ रहने के लिए और वजन को संतुलित रखने के लिए कीवी फल को स्नैक्स के तौर पर अपने आहार में शामिल कर सकते हे।


कीवी फल खाने के नुकशान


➤ कई लोगो में कीवी का अधिक सेवन करने से ओरल एलर्जी सिंड्रोम होने की सम्भावना भी बढ़ जाती हे। इसमें मुँह, होठ और जीभ में सूजन हो जाती हे।

➤ अगर आपको गेस्ट्राइटिस या पाचन से सबंधित कोई परिशानी हे तो कीवी न खाये क्योकि कीवी में मौजूद एसिड इस समस्या को बढ़ा सकता हे। साथ ही इसकी वजह से चककर आने, उल्टी और डायरिया की समस्या पैदा हो सकती हे।

➤ जिन लोगो को किडनी की समस्या हे उन्हें कीवी फल से परहेज करना चाहिए। दरअसल कीवी में पोटैशियम मौजूद होता हे जो किडनी की बीमारी में नुकशान पहुंचाता है।

➤ गर्भवती महिलाओ को भी कीवी का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके सेवन करने से पहले डॉक्टर की राय जरूर ले ले।


कीवी फल की खेती के बारे में जानकारी

kiwi In Hindi

1. उपयुक्त जलवायु

➤ कीवी ठंडी जलवायु का पौधा हे। इसकी खेती ज्यादातर ठंडे स्थानों पर की जाती हे। जहा पर सर्दियों के मौसम में 6 से 7 डिग्री सेल्सियस तापमान रहता हे। वही गर्मियों में भी 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं हो। ज्यादा गर्म स्थान कीवी की खेती के लिए सही नहीं माना जाता है।

2. उपयुक्त मिट्टी

➤ कीवी की खेती के लिए गहरी दोमट मिट्टी व् हलकी अम्लीय मिट्टी उपयुक्त मानी जाती हे। पौधा रोपण करने से पूर्व मिट्टी के PH मान की जांच अवश्य कर ले। इसके लिए मिट्टी का Ph मान 5-6 होना चाहिए।

3. कीवी की उन्नत किस्मे

➤ पुरे विश्व में कीवी की सैकड़ो किस्मे पायी जाती हे किन्तु भारत में कीवी की निम्न किस्मो का ही उत्पादन किया जाता हे। जिन्हे कलम या ग्राफ्टिंग विधि द्वारा तैयार करते हे। कीवी की उन्नत किस्मे जैसे की मोंटी, एलिसन, ब्रूनो, एबाट आदि किस्मे हे जिसमे से आपको अपनी बागबानी के लिए पसंद करना होता हे।

4. खेत की तैयारी

➤ सबसे पहले खेत में गहरी जुताई कर दे जुताई के बाद खेत में पानी लगा दे बाद में खेत को ऐसे ही छोड़ दे फिर पानी सुख जाने के बाद खेत को फिर से दो से तीन तिरछी जुताई कर दी जाती हे। इसके बाद खेत में पाटा लगाकर खेत को समतल कर दिया जाता हे।

➤ पौधो की रोपाई करने के लिए समतल भूमि में 5 से 7 मीटर की दुरी रखते हुए एक मीटर चौड़े और दो फिट गहरे गड्डे तैयार कर लिए जाते हे। तैयार किये गड्डो में जैविक खाद की पर्याप्त मात्रा को मिट्टी में अच्छे से मिलाकर गड्डो में भर दिया जाता हे। उसके बाद गड्डो को सिंचाई कर दी जाती हे। यह गड्डे पौधे रोपाई के दो से तीन माह पूर्व तैयार कर ले।

5. पौधा रोपाई

➤ कीवी फल के पौधे नर्सरी में तैयार किये जाते हे बाद में उसे खेत में रोपाई की जाती हे। खेत में पौधे रोपने के लिए सबसे पहले जो गड्डे हमने जैविक खाद से भरे थे उसमे छोटे गड्डे किये जाते हे और इस गड्डो में नर्सरी से लाये गए पौधे की रोपाई कर दी जाती हे। बाद में पौधे की चारो तरफ मिट्टी डालकर अच्छे से दबा देते हे। पौधा रोपाई के लिए उत्तम समय दिसंबर से जनवरी के महीने माना जाता हे।

6. सिंचाई

➤ कीवी के पौधे रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई कर देनी चाहिए। और गर्मियों के मौसम में 3 से 4 दिन के अंतराल सिंचाई करनी चाहिए। और ठंड के मौसम में 8 से 10 दिन के अंतर्गत पानी देना चाहिए। और बारिश के मौसम में पौधो को जरूरत पड़ने पर पानी देना चाहिए। समय पर पौधो को सिंचाई न मिलने पर इसके फल की गुणवत्ता पर प्रभाव पड सकता हे।

7. रोग एव उपचार

➤ कीवी फल के पौधे में वैसे तो कोई ज्यादा विशेष रोग-किट नहीं लगते हे। लेकिन जड़ गलन का रोग पौधे में जलभराव की वजह से दिखाई दे सकता हे। इसके लिए पौधे की जोड़ो को बवि-सिस्टा की उचित मात्रा में चिंडकाव जलभराव समाप्त होने के बाद कर देना चाहिए। और पौधो की रोजाना देखभाल करते रहना चाहिए ताकि कोई रोग दिखे तुरंत ही उसका निवारण हो जाये।

8. फलो की तुड़ाई

➤ कीवी की फसल को तैयार होने में 4 वर्ष से भी अधिक का समय लग जाता है। जब इसके पौधो पर फूल आने शुरू हो जाते हे उसके 8 से 9 माह पश्चात् फल पककर तैयार हो जाते हे उस दौरान फलो की तुड़ाई कर ली जाती हे। कीवी फल पकने के बाद मुलायम और काफी आकर्षक सुनहरा दिखाई देता हे। फलो की तुड़ाई करने के बाद उसे अच्छे से बाजार भेज दिया जाता हे।


कीवी के बारे में अक्शर पूछे जाने वाले सवाल


1. भारत में कीवी फल कहा पैदा होता है?

➤ भारत में कीवी फल हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश की जलवायु के अलावा देश के पहाड़ी क्षेत्रों सिक्किम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक और केरल में भी इसका उत्पादन होता हे।

2. कीवी फल कितने रुपये किलो है?

➤ कीवी फल की किमंत करीबन 150 से लेकर 400 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती हे।

3. कीवी फल सबसे पहले कहा उगाया गया था?

➤ कीवी फल सबसे पहले चीन में उगाया गया था उसके बाद वहा से न्यूजीलैंड पंहुचा और आज विश्वभर में इसकी कई किस्मे पायी जाती हे।

4. कीवी फल किस देश का राष्ट्रीय फल माना जाता है?

➤ कीवी चीन का राष्ट्रिय फल माना जाता है।


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बुधवार, 21 सितंबर 2022

पिस्ता फल के बारे में जानकारी - Pistachio Fruit In Hindi

👉 हैलो दोस्तों आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार है। तो आज हम इस आर्टिकल में बात करने वाले है पिस्ता फल की जानकारी, पिस्ता फल खाने के फायदे और नुकसान, अमेजिंग फैक्ट्स, तो उम्मीद है की आपको यह हमारा आर्टिकल पसंद आयेगा। तो चलो देखते है नाशपाती फल के बारे में।


पिस्ता फल के बारे में जानकारी

👉 पिस्ता हरे रंग का सूखा मेवा है। पिस्ता मुख्य रूप से ईरान, अफगानिस्तान एवं मध्य एशिया के देशों में पाया जाता है। पिस्ता इसके अलावा वर्ल्ड में इटली, पाकिस्तान, सीरिया, तुर्की, मिश्र और ईराक में पिस्ता की खेती की जाती है। पिस्ता का पेड़ करीबन 10 मीटर ऊँचा छोटा आम के वृक्ष के जैसा दिखता है। इस के पतों पर एक प्रकार का किटकोष कीड़ों का घर बनता है। ये एक और से गुलाबी और दूसरी और से पीला और सफेद रंग का होता है। यह फल 10-20 मिमी लम्बे और 6-12 मिमी व्यास के होते है। इस फल का छिलका हल्के पीले से गहरे पीले रंग के होते है। पिस्ता के पेड़ में फूल और फल जनवरी से जून महीने में आते है। 

👉 पिस्ता का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। पिस्ता में कई तरह के आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते है। इसमें विटामिन ए, विटामिन बी-6, विटामिन सी, विटामिन ई, विटामिन के, कैल्शियम, मैगनीज, थियामिन, प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स, कॉपर और फास्फोरस इत्यादि पाए जाते है।


पिस्ता फल के बारे में अमेजिंग फैक्ट्स

1. पिस्ता को इंग्लिश नाम Pistachio है। 

2. पिस्ता मुख्य रूप से ईरान, अफगानिस्तान एवं मध्य एशिया के देशों में पाया जाता है, इसके अलावा वर्ल्ड में इटली, पाकिस्तान, सीरिया, तुर्की, मिश्र और ईराक में पिस्ता की खेती की जाती है।

3. पिस्ता में विटामिन E, विटामिन K और B2 ज्यादा होता है, अन्य पोषक तत्वों में पोटैशियम, प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम आयरन इत्यादि होते है। 

4. दुनिया में सबसे ज्यादा पिस्ता ईरान, सीरिया, तुर्की में पैदा होता है। 

5. पिस्ता खाने से मर्द की शारीरिक कमजोरी दूर होती है।

6. पिस्ता बादाम के साथ दूध में मिलाकर पीने से ताकत आती है।

7. पिस्ता का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।

8. पिस्ता का पेड़ करीबन 10 मीटर ऊँचा छोटा आम के वृक्ष के जैसा दिखता है।

9. पिस्ता के पेड़ में फूल और फल जनवरी से जून महीने में आते है।


पिस्ता फल खाने के फायदे

1. कैंसर के लिए

👉 पिस्ता में विटामिन बी 6 होता है ये सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मददरूप होता है। यह शरीर को अधिक प्रतिरोधी बनता है। जिससे संक्रमणों के खिलाफ लड़ने और कैंसर कोशिकाओं से बचाव करने में मददरूप होता है।

2. आँखों के लिए

👉 एंटीऑक्सीडेंट ल्यूटिन और जेक्सेंथिन आँखों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। पिस्ता उन दोनों एंटीऑक्सीडेंट का एक अच्छा स्रोत है। हर रोज पिस्ता सेवन करने से आप अपनी आँखों की संभावित बीमारियों से बचा सकते है।

3. हड्डियों के लिए

👉 पिस्ता में विटामिन डी और कैल्शियम पाए जाते है जो हमारी हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसका रोजाना सेवन करने से हड्डियों को मजबूती मिलती है और हड्डियों से जुड़ी तमाम बीमारियों से राहत मिलती है।

4. डायबिटीज के लिए

👉 पिस्ता का सेवन डायबिटीज के मरीज के लिए बहुत लाभकारी होता है। इसमें लो ग्लोसेमिक इंडेक्स होता है जो डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करता है।

5. सूजन के लिए

👉 पिस्ता खाने से शरीर की सूजन को कम किया जा सकता है। पिस्ता में मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी एंड एंटीऑक्सीडेंट गुण सूजन से राहत पहुंचाने का काम करता है।

6. इम्यूनिटी के लिए

👉 पिस्ता में मौजूद टोकोफेरॉल प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर करता है। मजबूत इम्यूनिटी शरीर को कई संक्रमण से बचाने और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

7. वजन के लिए

👉 अगर आप वजन को घटाना चाहते है तो पिस्ता का सेवन फायदेमंद होता है। पिस्ता से पेट भर जाता है और लम्बे समय तक भूख भी नहीं लगती। यह लो कैलोरी और हाई प्रोटीन का स्रोत होता है। जिससे वजन कम करने में मदद करता है।

8. हृदय के लिए

👉 हृदय के रोगों से पीड़ित है तो आपको पिस्ता का सेवन करना चाहिए पिस्ता खाने से हृदय स्वस्थ रहता है, इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कम होता है, इसके साथ तंत्रिकाओं को भी मजबूती प्रदान करता है।

9. बालों के लिए

👉 पिस्ता हमारे बालों की ग्रोथ को बढ़ाने के लिए बहुत लाभकारी होता है। क्योकि इसमें मौजूद विभिन्र प्रकार के पोषक तत्व है। पिस्ता का सेवन आप रोजाना कर सकते है और फिर पिस्ता का लेप बनाकर अपने बालों में भी लगा सकते है। इससे आपके बालों की ग्रोथ बढ़ेगी।

10. आंतो के लिए

👉 पिस्ता हमारे आंतो के लिए बहुत लाभकारी होता है। क्योकि पिस्ता में पाए जाने वाले पोषक तत्व हमारी आंतो को मजबूती प्रदान करता है। पिस्ता का सेवन करने से आंतो की श्लेष्मा झिल्ली में सूजन  नहीं आती है और यह हमारी आंतो को ठीक तरीके से कार्य करने में भी मदद करता है।


पिस्ता फल खाने के नुकशान 

👉 पिस्ता में उच्च मात्रा में प्रोटीन फाइबर पाया जाता है। अधिक मात्रा में पिस्ता का सेवन करने से ये आपका वजन बढ़ा सकता है।

👉 पिस्ता अधिक खाने से पेट की समस्या हो सकती।

👉 इसमें सोडियम कम मात्रा में पाया जाता है, सोडियम के कम होने पर आपको ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है।

👉 पिस्ता का सेवन से सांस की समस्या हो सकती है। क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे ब्लड में इसका स्तर बढ़ जाता है और सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

👉 पिस्ता के सेवन से एलर्जी की समस्या हो सकती है, जैसे की रैशेज, खुजली, लालिमा आदि।


पिस्ता फल के बारे में अक्शर पूछे जाने वाले सवाल

1. पिस्ता में कौन सा विटामिन पाया जाता है?

👉 पिस्ता में विटामिन बी-6, विटामिन सी, विटामिन ई, विटामिन के पाया जाता है, और कैल्शियम, मैगनीज, थियामिन, प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट्स, कॉपर और फास्फोरस पाए जाते है।

2. पिस्ता कब और कैसे खाना चाहिए?

👉 पिस्ता सुबह भीगा हुआ खाने से सेहत को कई फायदे हो सकते है और इसे रात को सोने से पहले भी पिस्ता का सेवन कर सकते है।

3. पिस्ता की तासीर क्या होती है?

👉 पिस्ता की तासीर गर्म होती है, इसे इसलिए ज्यादातर सर्दियों में खाया जाता है, गर्मियों में पिस्ता का सेवन सीमित मात्रा में ही करें वर्ना पेट में गर्मी बढ़ने के साथ कब्ज आदि समस्याएं हो सकती है।

4. पिस्ता को कैसे खाया जाता है?

👉 पिस्ता की बाहरी सेल को हटा कर खाया जाता है, ये नट ना केवल खाने में स्वादिष्ट होते है, लेकिन सुपर हेल्दी भी होते है, पिस्ता सलाद, आइसक्रीम और अन्य बेक्ड फड्स में उपयोग किया जाता है, इसे आप एक स्नैक के तौर पर भी खा सकते है।

5. पिस्ता कैसे खाने चाहिए?

👉 पिस्ता रात में भिगोकर सुबह खा सकते है, आप इसे दूध में डालकर भी पी सकते है और इसे रोस्ट करके खा सकते है।

6. पिस्ता की रेट क्या है?

👉 पिस्ता की किमत 1150 से 1170 रूपये किलो के बीच चल रहा है।

7. प्रेगनेंसी में पिस्ता खा सकते है?

👉 गर्भवस्था में पिस्ता खाना पूरी तरह से सुरक्षित है, पर इसे ज्यादा मात्रा में न खाए।


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