मजबूरी पर शायरी || Shayari On Majburi

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Majburi Shayari In Hindi

 

मज़बूरी शायरी

 

 न बनाओ किसी की मज़बूरी का मजाक 

जिंदगी कभी मौका देती हे तो 

कभी धोखा भी देती हे। 

 

जुदा होता हे जब कोई मजबूरी में 

तो जरुरी नहीं वो बेवफा हो 

आपकी आँखों में आंसू देखकर 

उसका भी दिल आपसे ज्यादा रोता हे। 

 

 

ऐसे मोड़ पर खड़ा कर देती हे 

मजबूरिया 

की इंसान बुराइया अपना लेता हे 

अछाईया छोड़ कर। 

 

गमले में लगे पेड़ो की भी क्या खूब मजबूरी हे 

हरा भी रहना हे और बढ़ना भी हे। 

 

Shayari On Majburi

 

डरा सकती हे, हरा सकती हे 

वो मजबूरी हे साहेब 

वो इंसान से कुछ भी करवा 

 सकती हे। 

 

अगर तेरी मजबूरी हे ख़ामोशी तो 

रहने दे इश्क कौनसा जरुरी हे। 

 

आपकी मजबूरी समज ते हे लोग तभी 

तो उसका फायदा उठाते हे। 

 

 

वह मान न सके गुजारिश हमारी 

मजबूरी हमारी वह जान न सके 

कहते हे याद रखेंगे मरते दम तक 

जीते जी पहचान न सके। 

 

Majburi Shayari Image

 

Majburi Shayari

 

वफ़ा करो आपको कुछ अलग ही 

करना हे तो 

वरना मजबूरि का नाम लेकर 

बेवफाईया तो सभी करते हे। 

 

किसी ये बेबसी और मजबूरी हे 

कुदरत के आगे 

बेगुनाह होकर भी देखो कैसे 

सब अपने ही घरमे कैद हे। 

 

बैगाना बना दिया अपना बनाकर 

फिर कुछ दिनों में 

भर गया दिल हमसे और मजबूरी का 

बहाना बना दिया। 

 

आशिकी पर शायरी 

कोई समझता नहीं किसी की मजबूरी 

दिल टूटे तो दर्द होता हे मगर 

कोई कहता नहीं। 

 

Majburi Shayari Image

 

अपनी हसरतो को खुद मरते देखा 

उसे गैरो से बात करते देखा 

मजबूरिया भी क्या शय हे साहेब 

तमन्नाओ को अपनी सूली चढ़ते देखा। 

आज साहिल पे बैठे यु सोचते हे कोन 

ज्यादा मजबूर हे 

ये किनारा जो चल नहीं सकता या वो लहर 

जो ठहर नहीं सकती। 

 

वो कहते हे बहोत मजबूरिया हे 

साफ लफ्जो में खुद को 

बेवफा नहीं कहता। 

 

इग्नोर शायरी 

एक इतेफाफ हे मिलना 

और बिछड़ना मजबूरी हे 

चार दिन की ये जिंदगीमें 

होना जरुरी हे सबका साथ। 

 

Shayari On Majburi

 

Shayari On Majburi

 

कभी दिल के दूर नहीं होने देंगे 

नजरो से भले ही दूर 

ये दिल आपको कभी याद न करे 

इसे कभी इतना मजबूर 

होने नहीं देंगे। 

 

कुछ इस तरह मजबूर तुम भी हो जाओंगे 

की हीर की मोहब्बत में रांझा था 

जिस तरह। 

 

कभी कभी न लड़के बेवफा होते हे न 

लड़किया बेवफा होती हे और 

रिस्ता ख़त्म हो जाता हे मगर ये सिर्फ 

मजबूरियों की वजह से। 

 

इश्क पर शायरी 

थक जाता हु अनकहे शब्दों के बोझ से 

पता नहीं चुप रहना समझदारी हे 

या मजबूरी। 

 

Majburi Shayari 2021

 

भूल जाने की तेरी मजबूरी हे तो 

मेरी भी आदत हे तुजे याद 

रखने की। 

 

इतना भी फायदा न उठाओ 

किसी की अच्छाई का 

की वो बुरा बनने के लिए 

मजबूर हो जाये। 

 

 

किस्मत ने मजबूर कर दिया 

माफ़ करना मेरे दोस्त 

दोस्ती आपसे की और आपसे ही 

दूर कर दिया।

 

वफ़ा से नाज आये चलो हम भी 

मोहब्बत कोई मजबूरी 

नहीं हे। 

 

Majburi Shayari 2022

 

2021 Majburi Shayari In Hindi

 

जुल्म भी बहोत करते हे और जालिम 

भी बहोत हे 

पर मजबूरी हे हमारी जो उनसे 

बेपनाह मोहब्बत करते हे। 

 

चलो मान लेते हे तेरी मजबूरिया 

भी होंगी 

मगर तेरा वादा भी था मुझे 

याद रखने का। 

 

 

न कोई लाचारी हे न कोई मजबूरी हे 

बेवफाई उसकी पैदायशी 

बीमारी हे। 

 

मजबूरी थी मेरी मर्जी नहीं 

मेरी उससे बिछड़ ने की 

और वो समज न सके। 

 

Majburi Par Shayari

 

तेरी मजबूरी हे मुझे भूल जाने की 

या किसी ने 

मजबूर कर दिया। 

 

प्यार के हाथो हम कितने मजबूर हे 

न तुजे पाने की औकात न 

तुजे खोने का हौसला। 

( ये पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद )

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